Friday, April 24

सेंट्रल मार्केट सीलिंग कार्रवाई में अधिकारियों पर धांधली का आराेप, व्यापारियों का विरोध प्रदर्शन जारी

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मेरठ 24 अप्रैल (प्र)। मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट सीलिंग प्रकरण के बाद आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जहां मार्केट के सेक्टर 2 में विरोध प्रदर्शन जारी है तो सीलिंग कार्रवाई को लेकर भी में अब नए-नए खुलासे और आरोप सामने आ रहे हैं। बीते दिन उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ सलाहकार अवनीश अवस्थी के मेरठ दौरे के दौरान व्यापारियों और अधिकारियों के बीच हुई बैठक में कई गंभीर मुद्दे उठाए गए। बैठक में व्यापारियों ने आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों पर सीधे तौर पर पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। सबसे बड़ा सवाल यह रहा कि आखिर 56 भवनों की सूची में से 12 नाम कैसे हट गए और केवल 44 पर ही सीलिंग कार्रवाई क्यों हुई?

व्यापारियों का दावा है कि जो सूची सुप्रीम कोर्ट में पेश होनी थी, वह पहले ही 3 तारीख को कुछ लोगों तक पहुंच गई। इस पर सवाल उठाते हुए व्यापारियों ने कहा कि अगर कोई गड़बड़ी नहीं थी, तो लिस्ट पहले कैसे बाहर आई? इस पूरे मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि आवास विकास के अधिकारियों ने कोर्ट और सरकार दोनों को गुमराह किया।

सूची से बाहर किए गए 12 भवनों में कैलाश डेरी का नाम प्रमुख रूप से चर्चा में है। मार्कैट के व्यापारियों का कहना है कि वहां व्यावसायिक गतिविधियां जारी थी इसके बाद भी सीलिंग लिस्ट से उनका नाम कट गया । इसी प्रकार आईडीबीआई बैंक की बिल्डिंग को सील कर दिया गया लेकिन पास ही स्थित एसबीआई की बिल्डिंग को छोड़ दिया गया। इसे लेकर भी अधिकारियों पर दोहरी नीति अपनाने के आरोप लगे।

इस पूरे आंदोलन के बीच एक और विवाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों से करीब 14 लाख रुपये का चंदा जुटाया गया अब इस रकम का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं दिया जा रहा है। पूरे प्रकरण को लेकर व्यापारियों द्वारा बनाए गए एक व्हाट्सएप ग्रुप्स में व्यापारी इस पर नाराजगी जता रहे हैं और कुछ “सफेदपोश” लोगों के नाम सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।

सेंट्रल मार्केट सीलिंग प्रकरण अब सिर्फ अतिक्रमण या नियमों का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पारदर्शिता, प्रशासनिक निष्पक्षता और जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। फिलहाल व्यापारियों को राहत के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिला है।

सेंट्रल मार्किट में पिछले काफी समय से सेट बैक को लेकर भ्रम की स्थिति है। यह साबित करने का प्रयास हो रहा है कि 60 मीटर तक के आवास के लिए सेट बैक जरूरी नहीं है। जबकि विभागीय सूत्रों की मानें तो नियम सब के लिए बराबर हैं। सेट बैक नहीं छोड़ा तो छोटे आवासों पर भी कार्रवाई होना तय है।

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