ऑनलाइन गेमिंग यानि सट्टा और जुआ देश के कितने परिवारों की बर्बादी और आर्थिक नुकसान व जान देने का कारण बन रहा है इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता क्योंकि आए दिन इससे संबंधित खबरें पढ़ने सुनने देखने को मिल रही है। क्योंकि फिल्मी कलाकार और अन्य जिस प्रकार से ऑनलाइन गेमिंग का प्रचार व इसमें धन जीतकर रईश बनने की खबरें और विज्ञापन दिखाए जाते हैं उसने छोटे बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों को इस ओर आकर्षित किया जिसके चलते परिजनों से धोखाधड़ी चोरी व अन्य ऐसे कारण पैदा हो गए जिसे समाजहित में नहीं कह सकते। हम पिछले कई सालों से समाज में पनप रही इस बुराई की ओर सरकार का ध्यान दिलाते हुए इस पर रोक लगाने और इसे प्रोत्साहन देने वाले वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह सरकार से करते चले आ रहे हैं।
देर से ही सही सरकार द्वारा इस बारे में सख्त कदम उठाए गए हैं जिसके तहत सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि समाज में एक बहुत बड़ी बुराई ऑनलाइन गेमिंग से आ रही है। इससे बचने के लिए ऑनलाइन खेल संवर्धन विनियमन विधेयक 2025 को सदन में पारित कराने के लिए रखा गया। यह विधेयक ऑनलाइन सटटेबाजी जुए को प्रतिबंधित करता है। अब ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में सट्टेबाजी के खेल पर नकेल लगेगी। इस विधेयक के पास होने से देश में मनी गेमिंग उद्योग जो दो लाख करोड़ का है । बताते चलें कि आनलाइन गेमिंग में हर साल 45 करोड़ लोग 20000 करोड़ रूपये। इसके साथ ही जुए में हारने के चलते कितने ही लोग अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। अब यह समस्या समाज के लिए गंभीर बन चुकी है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने जो फैसला लिया उसे बिल्कुल सही कहा जा सकता है। क्योंकि प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ आनलाइन गेमिंग बिल पास होने से अब आनलाइन गेमिंग एप को लोग डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। इसके स्थान पर स्पोर्टस और सोशल गेमिंग को प्रोत्साहित करने की बात सामने आ रही है। बताते चलें कि आनलाइन गेमिंग की लत के कारण मध्यमवर्गीया परिवारों को अपनी बचत गंवानी पड़ती है। आत्महत्याएं भी बढ़ रही है। डब्ल्यूएचओ ने भी गेमिंग डिसआर्डर जैसी बीमारी का वर्गीकरण किया है जो अनिंद्रा, तनाव और सामाजिक अलगाव का कारण बनती है।
इस बिल के पास हो जाने से अब 3 साल की सजा और एक करोड़ रूपये जुर्माना तक हो सकता है। इस व्यस्था के तहत अब इन खेलों पर प्रतिबंध और कंपनियों के लिए नियम इस प्रकार से हैं। किसी भी मनी गेम कौशल आधारित भाग्य आधारित पर पूर्ण प्रतिबंध होगा। इसके तहत आनलाइन सटटेबाजी जैसे फेंटेंसी और जुआ जैसे पोकर रमी आदि आएंगे। आनलाइन लॉटरी को भी प्रतिबंधित किया गया है। यह प्रतिबंध कम्यूटर मोबाइल में संचालित आनलाइन मनी गेम में लागू होंगे। विदेशों से संचालित आनलाइन मनी गेम पर भी पूर्ण रोक रहेगी। सभी माध्यमों पर मनी गेम के प्रचार और विज्ञापन पर रोक रहेगी। बैंक और भुगतान प्रणाली को ऐसे लेनदेन की अनुमति नहीं होंगी। अपराध गंभीर और गैर जमानती होंगे।
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट से पता चलता है कि 31 माह में 32 आत्महत्याएं इस तरह के मामलों में हुई। जो अपने आप में एक गंभीर विषय है। कुल मिलाकर यह जो बिल पास हुआ है अगर सरकार वाकई इसे लागू कराने में सफल हो जाती है और दोषियों को चाहे वह कितना बड़ा वीआईपी और उद्योगपति हो के खिलाफ होती है तो सरकार का यह जनहित में बहुत बड़ा प्रयास कहा जा सकता है।
मेरा मानना है कि पीएम मोदी और उनकी सरकार व मंत्री के द्वारा किए गए इस प्रयास के लिए उनकी सराहना की जानी चाहिए जिससे आलोचनाओं के बीच एक अच्छी अनुभूति हो। आम आदमी के लिए घातक बन रहे ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए सरकार प्रेरित रहे और उसे विश्वास हो कि आम आदमी इस मामले में उसके साथ खड़ा होगा। फिलहाल मेरी निगाह में यह निर्णय जनहित का बहुत बड़ा ऐसा माध्यम हो सकता है जो आर्थिक बर्बादी, होने वाली आत्महत्या में कमी और परिवारों की बर्बादी पर अंकुश लगेगा। अच्छा यह हो कि सरकार इस बिल के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों को सबक सिखाने के लिए तुरंत कार्रवाई करे।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
आनलाइन गेम पर प्रतिबंध, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लिया गया जनहित का सराहनीय निर्णय
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