Friday, August 29

डीजीपी और एडीजी साहब जाम का कारण बनने वालों के चालान काटने की बजाय श्रद्धांजलि देने आए लोगों के वाहनों के यातायात पुलिस ने काटे चालान, ऐसे तो लोग शोक व्यक्त करना भी छोड़ देंगे, अपनी नाकामी छिपाने के लिए पुलिस उत्पीड़न बंद करे

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आए दिन सड़कों के किनारे और चौराहों पर आपको चालान करते यातायात पुलिस के सिपाही दिखते हैं। अगर मानवीय दृष्टिकोण और सरकारी नीति से सोचे तो यह अच्छा कदम है जिससे नियम तोड़ने वालों पर अंकुश लग सकता है। अगर पुलिसकर्मी ईमानदारी से काम करे तो। यूपी के डीजीपी द्वारा समय समय पर सुधार के कार्यक्रमों और भयमुक्त वातावरण के लिए काम किए जा रहे हैं। मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर के निर्देश पर मेरठ जोन में एक सप्ताह तक पांच सफल ऑपरेशन चलाए गए। यह अच्छी बात है। पुलिस कप्तान भी कई अभियानों के तहत उन पर कार्य कराने के प्रयास करते हैं लेकिन जहां तक नजर आ रहा है वहां तक यह लगता है कि यातायात पुलिस के अधिकारी आम आदमी का उत्पीड़न नियमों को लागू करने की बजाय ज्यादा करने लगे हैं। पाठको को रोज ही सड़कों पर ऐसे नजारे दिखते होंगे जिनमें टेंपों ज्यादा सवारी भरकर जहरीला धुंआ छोड़ते और जुगाड़ वाहनों में सरिया गाटर ले जाते नजर आएंगे मगर जैसा देखा और सुना यातायात पुलिस को वो तो नहीं दिखते मगर दूसरे प्रदेशों के वाहन और दोपहिया वाहन चालकों को कागज ना दिखाने और हेलमेट ना होने पर उसका चालान करने में लगे रहते हैं।
यूपी के डीजीपी और मेरठ जोन के एडीजी बीते 19 अगस्त को दिल्ली रोड पर दिन में एक से तीन बजे तक जगदीश मंडप के गेट नंबर एक में एक तेहरवी रस्म पगड़ी शोक श्रद्धांजलि का आयोजन था। जनपद के प्रभावशाली व्यक्ति धनेंद्र जैन के पुत्र को श्रद्धांजलि देने लोग वहां पहुंचे थे। जब लौटकर बाहर आए तो ज्यादातर के मोबाइल पर यातायात पुलिस के चालान की सूचना मिली। तब सब अपना सिर पीटकर रह गए और कितने यह कहते सुने गए कि लगता है कि यातायात पुलिस अपनी नाकामी छिपाने, लगने वाले जाम को रोकने में और सड़कों पर अतिक्रमण रोकने की नाकामी का सारा नजला नागरिकों के वाहनों के चालान कर उतारना चाहती है। जिससे चालान के पैसे के दम पर अपनी वाहवाही दिखाकर अफसरों को खुश किया जा सके।
गाड़ी नियम विरूद्ध थी तो चालान में कोई बात नहीं है लेकिन जब आदमी के चालान हो रहे थे तो वहां मौजूद सरकारी वाहनों के भी होने चाहिए थे क्योंकि सड़क पर तो वो भी खड़ी थी। मगर यातायात पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली का परिचय देते हुए एक दुकान के बाहर यातायात में बाधा उत्पन्न करने वाले एक भंडारे के खिलाफ तो कोई कार्रवाई नहीं की जबकि प्रयास करते तो वो साइड की सड़क पर भी हो सकता था। जगदीश मंडप के गेट दो पर काफी गाड़िया खड़ी हो सकती थी लेकिन अफसरों उस गेट को खुलवाकर गाडियां खड़ी कराना जरूरी नहीं समझा बस श्रद्धांजलि देने आए लोगों के वाहनों का चालान करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं यातायात पुलिस के इंस्पेक्टर बुजुर्ग नागरिकों से दुर्व्यवहार करने में भी पीछे नहीं रहे। इनका कहना था कि हम तो धूप में खड़े हैं और तुम लोग व्यवस्था बिगाड़ रहे हो। अब कोई समझाए कि जो आदमी श्रद्धांजलि देने जा रहा है उस पर भी धूप और धुल का असर पड़ रहा है। अब अगर यह धूप में खड़े हैं तो मोटा वेतन और सुविधा ले रहे हैं। अगर ज्यादा समस्या है तो ऐेसे अफसर इस्तीफा दे दें। आम आदमी के साथ ऐसा व्यवहार सही नहीं है। डीजीपी और एडीजी साहब अगर पुलिस की ऐसी कार्यप्रणाली जारी रही तो लोग किसी के सुख दुख में जाना छोड़ देंगे। क्योंकि विवाह मंडपों के बाहर खड़े वाहनों के खिलाफ वो कोई कार्रवाई नहीं करते। बस आम आदमी को धमकाकर व्यवस्था बिगाड़ने का काम करते नजर आते हैं। वो तो अच्छा है कि आम आदमी सहनशील है वरना जो काम यातायात पुलिस कर रही है वो सरकार की बदनामी का कारण बन सकती है। क्योंकि डीजीपी और एडीजी तथा पुलिस अधीक्षक द्वारा नागरिकों के हित में काफी काम किया जा रहा है। वो भयमुक्त वातावरण के लिए उनके प्रयासों को देखते हुए यातायात पुलिस द्वारा किया जा रहा उत्पीड़न भी झेल रहे हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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