आईआईएमटी विश्वविद्यालय में उपराष्ट्रपति के हाथों सम्मानित हुए मेधावी, चार हजार छात्रों को मिली डिग्री
मेरठ 22 अप्रैल (प्र)। आईआईएमटी विश्वविद्यालय में आयोजित तृतीय दीक्षांत समारोह मंगलवार को भव्यता और गरिमा के साथ मनाया गया। समारोह के मुख्य अतिथि उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मेधावी छात्र-छात्राओं को मेडल और डिग्रियां प्रदान कीं। इस अवसर पर करीब 3940 विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधियां दी गईं, जबकि 203 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 29 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। इस मौके पर उप राष्ट्रपति ने कहा कि 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की अहम भूमिका होगी। भारत आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरेगा।
दीक्षांत समारोह के मंच पर कुलपति डॉ. दीपा शर्मा, कुलसचिव डॉ. वीपी राकेश मंत्री धर्मपाल सिंह और राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन और कुलगीत के साथ हुआ।
कुलपति डॉ. दीपा शर्मा ने विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए संस्थान की उपलब्धियों, नवाचार और नीतियों की जानकारी दी। उन्होंने नेपटल से प्राप्त सम्मान और गूगल के साथ हुए करार को छात्रों के उज्जवल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति द्वारा विश्वविद्यालय की वार्षिक टेक्निकल मैगजीन ऊर्ध्व के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया गया। कुलाधिपति योगेश मोहन गुप्ता ने विद्यार्थियों को दीक्षांत की शपथ दिलाई और विश्वविद्यालय की परंपराओं से अवगत कराया। प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे पौधों के विकास के लिए पानी आवश्यक है, वैसे ही मनुष्य के विकास के लिए शिक्षा जरूरी है। उन्होंने छात्रों को कठिन परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
मेधावियों को मिले स्वर्ण पदक और सम्मान
समारोह में 17 मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष पुरस्कार प्रदान किए गए जिनमें स्व. ओम प्रकाश गुप्ता स्मृति पुरस्कार ( यूनिवर्सिटी टॉपर), डॉ. सत्य प्रभा गुप्ता स्वर्ण पदक और कुलाधिपति स्वर्ण पदक शामिल रहे। विभिन्न संकायों के टॉपर्स को भी सम्मानित किया गया। कुलाधिपति योगेश मोहन गुप्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय शिक्षा, खेल और नवाचार के क्षेत्र में छात्रों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को 5 लाख रुपये तक का नकद पुरस्कार दिया जाता है। साथ ही विभिन्न स्कॉलरशिप योजनाएं और कोविड काल में अनाथ हुए बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था भी की गई है। दीक्षांत समारोह में 2024 बैच के 1736 विद्यार्थियों ( 145 डिप्लोमा, 1068 स्नातक, 523 स्नातकोत्तर) और 2025 बैच के 1972 विद्यार्थियों (100 डिप्लोमा, 1401 स्नातक, ) स्नातकोत्तर) को डिग्रियां प्रदान की गई कुल मिलाकर लगभग 4 हजार विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
शोभायात्रा और सम्मान के साथ हुआ स्वागत
समारोह की शुरुआत उपराष्ट्रपति के आगमन से हुई, जिनका स्वागत विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगेश मोहन गुप्ता और प्रति कुलाधिपति डॉ. मयंक अग्रवाल ने किया। एनसीसी कैडेट्स ने सलामी दी और इसके बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न पदाधिकारी शामिल रहे। सभागार में पहुंचते ही उपस्थित लोगों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन एकता शर्मा ने किया आयोजन को सफल बनाने में डॉ. संदीप कुमार, डॉ. लखविंदर सिंह, डॉ. वत्सला तोमर, डॉ. वैभव शर्मा और डॉ. अक्षय राज सहित कई शिक्षकों और अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। समारोह में महापौर हरिकांत अहलूवालिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
2047 तक विकसित भारत बनाने का आह्वान
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की अहम भूमिका होगी। उन्होंने ईमानदारी, सेवा भाव और समर्पण के साथ कार्य करने का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने मेरठ-दिल्ली के बीच नमो भारत ट्रेन और मेट्रो सेवा शुरू होने से बढ़ी कनेक्टिविटी को अवसरों के विस्तार से जोड़ा। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिग्री प्राप्त करना शैक्षिक जीवन का अंत नहीं, बल्कि देश के विकास में योगदान देने की नई शुरुआत है। उन्होंने छात्रों को नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार देने वाला बनने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने जीवन में सफलता मिलने के बाद अपने माता-पिता और शिक्षकों के योगदान को कभी न भूलने की सीख दी। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा को राष्ट्र सेवा का माध्यम बनाएं और नवाचार, स्टार्टअप व उद्यमिता के क्षेत्र में आगे
बढ़ें। उन्होंने ने निरंजन पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी, परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती और महर्षि पाराशर ज्योतिष विद्यालय के निदेशक डॉ. हरी सिंह रावत को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की।
