Wednesday, April 22

सेंट्रल मार्केट से सबक, 22 हेक्टेयर भूमि पर फिर से होगी प्लाटिंग, सर्वे कर बनेगा लेआउट

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मेरठ 22 अप्रैल (प्र)। सेंट्रल मार्केट की तरह मेडा की आवासीय योजनाओं में अवैध निर्माण न बढ़े, इसलिए रिक्त प्लाटों का भूउपयोग स्थानीय जरूरत के अनुसार ही रखा जाएगा। मेडा की तीन कालोनियों शताब्दीनगर, लोहियानगर व गंगानगर में बिना उपयोग वाले काफी प्लाट हैं, जो प्राथमिक स्कूल, डाकखाना, टेलीफोन एक्सचेंज, सामुदायिक भवन आदि के लिए आरक्षित थे। इनकी कुल भूमि 22 हेक्टेयर है। इनका भूउपयोग बदलकर नए सिरे से बिक्री का निर्णय लिया है। मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना ने बताया कि प्लाटिंग के समय ध्यान रखा जाए कि भविष्य में आवासीय प्लाट का व्यावसायिक उपयोग न हो। यदि भविष्य में इनके व्यावसायिक उपयोग की आशंका दिखे तो उसे व्यावसायिक ही रखा जाए।

मेडा की बोर्ड बैठक में लैंड मोनेटाइजेशन के दूसरे चरण का प्रस्ताव रखा गया। यह जमीन लंबे समय से खाली थी या किसान अवैध रूप से खेती कर रहे थे। अब इन जमीनों का नियमानुसार भू-उपयोग परिवर्तन कर आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में लाया जाएगा। इनका ले-आउट प्लान 974 प्लाट का आकलन किया गया था। अब नए सिरे से लेआउट प्लान बनने से व्यावसायिक प्लाटों की संख्या बढ़ सकती है। मेडा ने लैंड मोनेटाइजेशन के पहले चरण में 28.67 हेक्टेयर भूमि पर ईडब्ल्यूएस, एलआइजी, एमआइजी, एचआइजी श्रेणी के आवासीय प्लाट और व्यावसायिक भूखंड समेत 1455 भूखंड विकसित किए थे। इनके आवंटन से करीब 700 करोड़ रुपये राजस्व मिला था।

शास्त्रीनगर के सील हुए स्कूल, अस्पताल को मिल सकती है भूमि
मेडा ने निर्णय लिया है कि शताब्दीनगर, लोहियानगर व गंगानगर में 22 हेक्टेयर में जो प्लाटिंग होगी उसमें व्यावसायिक प्लाट अधिक रखे जाएं। इनका क्षेत्रफल दो हजार वर्ग मीटर से अधिक रखने की तैयारी है। लक्ष्य रखा गया है कि भविष्य में यदि यहां पर स्कूल, अस्पताल, शापिंग कांप्लेक्स आदि खुलें तो निर्माण में समस्या न हो। माना जा रहा है कि शास्त्रीनगर में जिन स्कूल, अस्पताल आदि पर सील लगी है वे मेडा की कालोनियों में प्लाट खरीद सकते हैं।

कामर्शियल में तब्दील होंगे छोटे प्लाट
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण की योजनाओं में अधिक संपत्तियों के लिए आवश्यक दलों के निर्धारण के लिए प्रस्ताव पारित किए गए इसके साथ यह भी किया गया कि खाली पड़ी संपत्तियों में 974 प्लाटों की जगह उनका दोबारा से निरीक्षण किया जाएगा और उन प्लाटों को छोटा करके कमर्शियल में बेचा जाएगा जिससे मेरठ विकास प्राधिकरण की आय भी बढ़ेगी। बोर्ड बैठक में कमिश्नर भानु चंद गोस्वामी, डीएम डॉ. वीके सिंह, मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष संजय मीणा, सचिन आनंद कुमार, बोर्ड मेंबर नैन सिंह तोमर, बोर्ड मेंबर डॉ. चरण सिंह लिसाड़ी आदि मौजूद रहे।

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