मेरठ 07 अप्रैल (प्र)। सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई करते हुए शास्त्रीनगर योजना संख्या 7 में आवासीय भवनों में अवैध रूप से चल रहे स्कूलों, निजी अस्पतालों और व्यावसायिक कॉम्पलेक्स समेत 44 अवैध निर्माणों को सील करने के आदेश दिए हैं। इन सभी को 24 घंटे में सील किया जाना है।
सील होने वाले स्कूलों के बच्चों को दूसरे स्कूलों में और अस्पतालों के मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने को कहा गया है। सीलिंग की कार्रवाई परिषद और पुलिस प्रशासन करेगा। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी।
कोर्ट का सख्त आदेश मिलते ही व्यापारियों में खलबली मच गई। शाम को सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों के साथ ही स्कूल मैनेजमेंट और चिकित्सकों की संयुक्त बैठक हुई, जिसमें सीलिंग की कार्रवाई का विरोध करने का निर्णय लिया गया है। उधर आदेश मिलते ही परिषद की टीम ने 44 भवनों को तत्काल खाली करने की जानकारी व्यापारियों को दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए परिषद की आधी अधूरी स्टेटस रिपोर्ट पर कड़ी फटकार लगाते हुए शनिवार तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। इसके बाद आवास एवं विकास परिषद ने ऐसे आवासीय भवनों और भूखंडों की सूची तैयार की जो पूर्ण रूप से व्यावसायिक हो चुके हैं। टीम ने सेक्टर नंबर 1 से 13 तक के 44 ऐसे आवासीय भवनों को चिह्नित करके फोटो के साथ सूची तैयार की, जिनका उपयोग पूर्ण रूप से व्यावसायिक कार्य में किया जा रहा है। इन 44 आवासीय भवनों में से 6 में स्कूल, 6 में निजी अस्पताल और 4 में बैंक्वेट हॉल संचालित हो रहे हैं। बाकी 28 आवासीय भवनों को व्यावसायिक कॉम्पलेक्स में तब्दील कर दिया गया है। इन सभी के पास आवासीय नक्शा मिला है। भू उपयोग परिवर्तन करके व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। वहीं सील लगाने पहुंची आवास विकास परिषद की टीम से व्यापारी नेता शैंकी वर्मा, सरदार जीतू सिंह नागपाल ने कार्रवाई संबंधित आदेश दिखाने को कहा।
सेंट्रल मार्केट के व्यापारी दोषी नहीं
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप जैन ने कहा कि दोषी व्यापारी नहीं बल्कि घूसखोर व्यवस्था है। सुदीप जैन ने कहा कि रजिस्ट्री, जीएसटी, सर्किल रेट, प्रॉपर्टी टैक्स, बिजली कनेक्शन, सभी कुछ व्यावसायिक होना यह दर्शाता रहा कि सेंट्रल मार्किट को एक व्यावसायिक क्षेत्र के रूप में मान लिया जाए।
देर रात तक सेंट्रल मार्केट में पुलिस और व्यापारियों में गहमागहमी चलती रही। मार्केट में सीलिंग की कार्रवाई के लिए पुलिस रात में ही बैरिकेडिंग लेकर पहुंच गई।
पूर्व मंडलायुक्त ह्रषिकेश भास्कर यशोद हुए पेश
सुप्रीम कोर्ट में पूर्व मंडलायुक्त ह्रषिकेश भास्कर यशोद पेश हुए। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला ने उनसे 27 अक्टूबर 2025 को दिए गए आदेश के बारे में पूछा, जिसके बाद सेंट्रल मार्केट के अवैध निर्माणों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को रोक दिया गया था। कोर्ट उनके द्वारा दिए गए जवाब से ज्यादा संतुष्ट नहीं दिखी और डिटेल एक्सप्लेन मांगा।
स्कूलों, अस्पतालों को कैसे दे दिए कनेक्शन
सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय भवनों और भूखंडों में भू उपयोग परिवर्तन करके संचालित हो रहे स्कूलों, निजी अस्पतालों और बैंक्वेट हॉल को बिजली कनेक्शन दिए जाने की भी जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन ने किस आधार पर अवैध निर्माणों को बिजली कनेक्शन दिए हैं।
बिना आदेश की प्रति दिए सीलिंग हुई तो करेंगे विरोध
संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने बताया कि वह व्यापारियों के साथ सेंट्रल मार्केट में मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी तक अपलोड नहीं हुआ है। आवास विकास के अधिकारियों ने भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति व्यापारियों को उपलब्ध नहीं कराई है, न ही आदेश की प्रति अफसरों के पास है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अध्ययन नहीं हो पा रहा है। बिना आदेश की प्रति दिए आधी रात में पुलिस सेंट्रल मार्केट में तैनात हो गई है यह गलत है।
