मेरठ 07 अप्रैल (प्र)। लापवाही की इससे बड़ी दूसरी मिसाल कहीं देखने को नहीं मिलेगी कि हज यात्रा की तारीख बिल्कुल करीब आने के बावजूद अब तक कहीं भी न तो हज ट्रेनिंग कैंप शुरू किये गये हैं और न ही हज यात्रा पर जाने वाले लोगों को जागरूक करने के लिए कोई तरबियती कैंप ही शुरू किया गया है। जबकि हज यात्रा की तीसरी किस्त जमा कराने को नोटिस जारी कर दिये गये हैं। साहिबे निसाब मुसलमान के लिए अपनी जिंदगी में कम से कम एक बार हज करना फर्ज है। इस साल 2026 की हज यात्रा 18 अप्रैल से शुरू हो रही है। हज कमेटी के जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से हज 2026 के यात्रियों को बिना ट्रेनिंग के भेजा जाएगा। हालांकि दावा यह किया जा रहा है कि हज यात्रा को पूरी तरह से डिजिटल और हाईटेक बनाया गया है, जिसके लिए यात्रियों को नुसुक ऐप के जरिए अपनी तैयारी खुद करनी होगी। अब सबसे बड़ी दुश्वारियां यह हैं कि हज यात्रा पर जाने वाले अधिकांशतः लोग हाईटेक नहीं होते हैं। उन्हें तो आजकल के स्मार्ट मोबाइल भी ढंग से चलाने की सलाहियत नहीं आती है। वह तो मोबाइल का मतलब सिर्फ बात करने के बटन दबाने और काटने तक के फंक्शन ही जानते हैं। ऐसे में मोबाइल में नुसुक ऐप किस तरह डाउनलोड होगा। किस तरह उस ऐप के जरिये ट्रेनिंग मिलेगी और कैसे अरकान पूरे किये जायेंगे, सब कुछ सिवाये अंधेरे में तीर चलाने के और कुछ नहीं है।
मक्का में खुद खाना पकाने पर पाबंदी
इस साल 2026 की हज यात्रा में फिजिकल ट्रेनिंग कैंपों की जगह यात्रियों को नुसुक ऐप के माध्यम से हाईटेक प्रशिक्षण दे दिया गया। या यूं कह दें कि उनसे ट्रेनिंग के नाम पर रकम तो वसूल ली गयी, लेकिन उन्हें अंधेरे में तीर चलाने के लिए छोड़ दिया गया। इसके साथ ही इस साल के हज की कुर्बानी भी अब निजी तौर पर नहीं, बल्कि हज कमेटी ऑफ इंडिया के पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप से होगी। इस साल हज यात्रियों के लिए सबसे बड़ी दुश्वारी यह की गयी है कि उनको मक्का मुअज्जमां में भी अब खुद खाना पकाने पर रोक लगा दी गई है और राशन साथ ले जाने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
सभी कागजात की कॉपी रखें
हज यात्रियों को ट्रेनिंग देने वाले मदरसा नूरूल इस्लाम के मुफ्ती आसिफ बताते हैं कि हज के दौरान सबसे जरूरी बात यह है कि सभी जरूरी कार्ड्स और दस्तावेज, जैसे नुसुक कार्ड और अन्य पहचान पत्र हर समय अपने पास रखें। अगर ये कार्ड्स साथ नहीं होंगे, तो हज के विभिन्न मैदानों में जाने में दिक्कत आ सकती है।
कुर्बानी के लिए बनाये नये नियम
अक्सर देखा जाता था कि मक्का में कुर्बानी के नाम पर जायरीन के साथ धोखाधड़ी होती थी। कुछ जालसाज एक ही जानवर की अलग-अलग एंगल से फोटो दिखाकर कई लोगों से पैसे ऐंठ लेते थे। इसी फोटो वाली ठगी और गंदगी को रोकने के लिए सऊदी अरब सरकार ने नुसुक पोर्टल अनिवार्य कर दिया है। अब कुर्बानी के लिए केवल आधिकारिक ‘अदाही प्रोजेक्ट’ के माध्यम से ही ऑनलाइन जानवर बुक किए जा सकेंगे।
