Monday, April 15

शस्त्र लाईसेंस में पता परिवर्तन बना वीरबल की खिचड़ी, कभी थानेदार नहीं है तो कभी सिपाही

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मेरठ 14 मार्च (प्र)। एक तरफ सरकार और उच्च अधिकारी नागरिकों को सुरक्षित करने और इन्हें इसका एहसास कराने हेतु भरपूर प्रयास कर रहे है तो दूसरी तरफ कई बार न्यायालय भी निर्देश दे चुका है कि जरूरतमंद व्यक्तियों को नियम अनुसार शस्त्र लाईसेंस उपलब्ध करा दिये जाए। लेकिन एक तो इनको बनवाना इतना कठिन और महंगा हो गया है कि हर व्यक्ति आसानी से इस संदर्भ में हिम्मत नहीं जुटा पाता है। दूसरी तरफ नागरिकों का सरकार शासन और प्रशासन से संबंध हर कार्य सरलता से संपन्न कराने के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के प्रयासों को कुछ पुलिसकर्मी लागू करने को तैयार नजर नहीं आते है। क्योंकि थानेदार आम आदमी की आसानी से सुनने को तैयार नहीं होते। परिणाम स्वरूप परेशानियां हर मामले में नागरिकों का पीछा नहीं छोड़ रही है।

इसके नये उदाहरण के रूप में शस्त्र लाईसेंस का रिन्यूबल कराने या धारक ने अपना पता परिवर्तित किया है तो कागजों में उसे सही कराना बहुत कठिन कार्य हो गया है। आज एक भुक्त भोगी ने मौखिक रूप से बताया कि वो शहरी इलाके में रहता था अब उसने अपना पता परिवर्तन कर दिया है और पिछले एक माह से ऊपर सही जरूरी कागज जो संबंधित पुलिस अधिकारी ने बताये जमा कराये जाने के बावजूद अपनी रिपोर्ट लगाकर नहीं भेजी जा रही है। तथा थानेदार साहब से मिलने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है कभी जांच कर्ता अथवा सिपाही छुट्टी पर होते है तो कभी उच्च अधिकारी। इसलिए उसके लिए पता परिवर्तन कराना वीरबल की खिचड़ी के समान हो गया है। जब उससे पूछा गया कि कौन से थाने का मामला है तो उसका कहना था कि कोशिश कर रहा हूं अगर ये मीडिया में आया तो थानेदार नाराज हो जाएंगे और मेरी परेशानी बढ़ जाएगी। लेकिन एक आग्रह उच्च अधिकारियों से जरूर है कि ऐसे मामलों में सभी थानेदारों को निर्देश दे कि तय समय में शस्त्रों से संबंध ऐसे प्रकरणों की जांच कराकर उच्च अधिकारियों को भेजे तो और भी कुछ लोगों का भला हो सकता है जो पुलिस की कार्य प्रणाली से परेशान है।

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