मेरठ 15 अप्रैल (प्र)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने वर्ष 2026 से दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए बोर्ड परीक्षा का तनाव कम करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत अब छात्रों को मुख्य परीक्षा के तुरंत बाद द्वितीय बोर्ड परीक्षा के रूप में अंक सुधारने का अवसर मिलेगा। इसमें छात्र विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषाओं सहित अधिकतम तीन विषयों में अपनी परफॉरमेंस बेहतर कर सकेंगे।
फरवरी-मार्च 2026 में होने वाली प्रथम बोर्ड परीक्षा सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होगी। द्वितीय परीक्षा केवल उन छात्रों के लिए है जो अपने अंक सुधारना चाहते हैं। यह वैकल्पिक होगी। दोनों परीक्षाओं (मुख्य और सुधार परीक्षा) में से जिस परीक्षा में छात्र के अंक अधिक होंगे वही अंतिम मार्कशीट और डिजीलॉकर में दर्ज किए जाएंगे। छात्र केवल उन्हीं विषयों में सुधार परीक्षा दे सकेंगे, जिनमें वे मुख्य परीक्षा में शामिल हुए हों (अधिकतम तीन विषय)।
पंजीकरण और शुल्क प्रक्रिया
स्कूलों को इच्छुक छात्रों की लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स बोर्ड को भेजनी होगी। पंजीकरण का पहला चरण (18-31 मार्च 2026) संपन्न हो चुका है जबकि दूसरा चरण मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के अगले दिन से मात्र 5 दिनों के लिए खुलेगा। इसका शुल्क 320 रुपये प्रति विषय होगा। परीक्षा का सिलेबस वही रहेगा जो मुख्य परीक्षा का था छात्रों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। द्वितीय परीक्षा मई 2026 (15 मई से 1 जून) के बीच होने की संभावना है, जिसका परिणाम जून में जारी होगा।
कक्षा 12 से अलग है यह नीति
यह विशेष सुविधा फिलहाल केवल कक्षा दसवीं के लिए ही लागू की गई है। कक्षा 12 के छात्रों के लिए सुधार परीक्षा की व्यवस्था अभी भी अगले वर्ष की मुख्य परीक्षा के साथ ही बनी हुई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि सुधार परीक्षा के दौरान आंतरिक मूल्यांकन के अंकों में कोई बदलाव नहीं होगा। यह नीति विशेष रूप से ग्रामीण और कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए वरदान साबित होगी, क्योंकि वे बिना साल बर्बाद किए अपना स्कोर सुधार सकेंगे। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते स्कूल से संपर्क करें और cbse.gov.in पर नजर बनाए रखें।
