Friday, April 17

लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 850 करने का प्रस्ताव

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नई दिल्ली 15 अप्रैल। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए गुरुवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। इसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है। राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीट होंगी।

विधेयक में निर्वाचन क्षेत्रों का फिर से निर्धारण करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पेश किए जाएंगे।

संसद की 16 से 18 अप्रैल को होने वाली बैठकों के लिए सरकार ने प्रमुख विधायी कामकाज महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के लिए लाए जाने वाले विधेयकों की प्रति सांसदों को भेज दी है। ताकि 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण लागू किया जा सके। इसके लिए संबंधित विधेयकों का ड्राफ्ट सांसदों को भेज दिया गया है और प्रधानमंत्री 17 अप्रैल को इस पर जवाब दे सकते हैं।बिल के प्रावधानों के अनुसार लोकसभा में राज्यों के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए 815 से अधिक सदस्य नहीं होंगे और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए 35 से अधिक सदस्य नहीं होंगे।

महिलाओं के लिए आरक्षण 15 साल तक लागू रहेगा
विधेयक में लोकसभा-विधानसभाओं में एक-तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा। यह आरक्षण रोटेशन के आधार पर लागू होगा, यानी अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। महिलाओं के लिए यह आरक्षण 15 साल तक लागू रहेगा।

परिसीमन और सीट बढ़ोतरी का प्लान
इस पूरी प्रक्रिया में परिसीमन अहम भूमिका निभाएगा। सरकार 2011 की जनगणना को आधार बनाकर नई सीटों का निर्धारण करना चाहती है। अभी तक सीटों का आधार 1971 की जनगणना थी।

परिसीमन आयोग बनाया जाएगा, जिसका अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे। यह आयोग सभी लोकसभा सीटों को दोबारा तय करेगा और उसका फैसला अंतिम होगा, जिसे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। इस बदलाव का असर राज्यसभा और सभी राज्य विधानसभाओं पर भी पड़ेगा, जहां सीटों की संख्या में बदलाव हो सकता है।

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