मेरठ 24 जनवरी (प्र)। विकास प्राधिकरण ने मवाना रोड पुल से बीएनजी इंटरनेशनल स्कूल तक छह से आठ फीट ऊंची दीवार बनाकर दो लाख आबादी के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। रास्ता न होने से करीब छह माह से कसेरूखेड़ा नाले के ढाई किमी हिस्से की सफाई ठप है। नाले के अंदर लगातार सिल्ट, कचरा जम रहा है। झाड़ियां खड़ी हो गई हैं। शुक्रवार को यदि तेज बरसात हो जाती तो नाला ओवरफ्लो हो सकता था। क्षेत्रीय पार्षदों में आक्रोश है। उनका कहना है कि मेडा ने चौपाटी बनाने के चक्कर में जनता की सहूलियतों को दरकिनार किया है। बरसात से पहले सफाई का रास्ता न बना तो मुहल्ले जलमग्न हो जाएंगे। अब पार्षद इस मुद्दे को कमिश्नर के सामने रखेंगे, ताकि बरसात से पहले स्थायी समाधान हो सके।
दरअसल, पार्षदों की परेशानी का कारण बरसात में मुहल्लों में होने वाला जलभराव है। कसेरूखेड़ा नाला शहर के बड़े नालों में से एक है। करीब दो लाख आबादी की जलनिकासी इसी नाले पर निर्भर है। गंगानगर, राजेंद्रपुरम, राधा गार्डन, कसेरू बक्सर, डिफैंस कालोनी, मीनाक्षीपुरम, रक्षापुरम, सैनिक विहार, न्यू मीनाक्षीपुरम, खटकाना, ईशापुरम, कसेरूखेड़ा, खटकाना आजाद नगर, डोरली, सोफीपुर, अम्हेड़ा सहित अन्य कालोनियों व मुहल्लों की आबादी क्षेत्र और दौराला की फैक्ट्रियों का उत्सर्जित पानी इसी नाले में आता है। इन आबादी क्षेत्रों की छोटी-छोटी जलनिकासी कसेरूखेड़ा नाले से जुड़ी है।
मवाना रोड पुल से बीएनजी इंटरनेशनल स्कूल किला परीक्षितगढ़ रोड तक करीब ढाई किमी नाले की सफाई पिछली बरसात में निगम ने कराई थी। इसके बाद नाले के इस हिस्से में मेडा ने चौपाटी शुरू करने के लिए छह से आठ फीट ऊंची दीवार बना दी जिसके बाद से सफाई का रास्ता बंद है। सफाई न होने से दौराला तक से बहकर आ रही प्लास्टिक कचरे की गंदगी और सिल्ट जम रही है। पार्षदों का कहना है कि सफाई नहीं हुई तो कसेरूखेड़ा नाला उफनेगा। ऐसा होने से मुहल्ले जलमग्न होंगे। अभी डिफेंस कालोनी, मीनाक्षीपुरम, कसेरू बक्सर में ही जलभराव होता है। मेडा ने बाकी मुहल्लों के लिए भी नई मुसीबत खड़ी कर दी है।
नाला साफ हो या न हो.. निगम को चिंता नहीं
शासन को स्वच्छ व सुंदर शहर बनाने की रिपोर्ट भेजने वाले नगर निगम अधिकारी भी कसेरू खेड़ा नाले की इस समस्या को भूलकर बरसात का मौसम आने और जलभराव का इंतजार कर रहे हैं। पिछले साल जुलाई-अगस्त में कसेरूखेड़ा नाले के उफनने पर डिफेंस कालोनी में जलभराव हुआ था। तब निगम के मुख्य अभियंता प्रमोद कुमार सिंह और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. अमर सिंह से मेडा के अधिशासी और अवर अभियंता ने वादा किया था कि नाला सफाई के लिए दीवार किनारे रास्ता दिया जाएगा। छह महीने हो गए हैं। मेडा ने दीवार बनाकर पेडेस्ट्रियन स्ट्रीट में चौपाटी का ठेका भी छोड़ दिया लेकिन नगर निगम के आला अधिकारियों को इतना भी समय नहीं मिला कि वह मेडा के वादे की पड़ताल कर लेते।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के मानकों में भी चौपाटी के लिए स्वच्छ जगह जरूरी
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी रवि शर्मा ने कहा कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा चौपाटी या खाने-पीने की दुकान शुरू करने के लिए लाइसेंस जारी किया जाता है। इसके मानकों में खाना बनने वाली जगह स्वच्छ होनी चाहिए। नाले के ऊपर या सटाकर खानपान की दुकानें संचालित नहीं की जा सकतीं। नाले की दुर्गंध, मक्खी-मच्छरों का प्रकोप नहीं होना चाहिए। जिस पानी की आपूर्ति पीने के लिए हो उसकी गुणवता लैब की जांच जरूरी होती है। ये मानक पूरे होने पर ही लाइसेंस जारी किया जाता है। मेडा ने जिस चौपाटी का ठेका दिया है, उसके लिए लाइसेंस का आवेदन आने पर मानकों के आधार पर लाइसेंस दिया जाएगा। दूषित खानपान से लोगों के बीमार पड़ने पर चौपाटी को संचालित करने वाले की जिम्मेदारी होगी।
मशीन तो छोड़िए, पैदल भी नहीं जा सकते
वार्ड 24 कसेरू बक्सर के पार्षद आनंद जाटव, वार्ड 20 कसेरूखेड की पार्षद शालू यादव और वार्ड 37 गंगानगर की पार्षद दीपिका शर्मा ने मेडा के अधिकारी के रास्ता दिए जाने और सुगंधित पुष्पों वाले पौधे लगाने की बात पर कहा कि ये सिर्फ कहने की बातें हैं। मेडा उपाध्यक्ष, सचिव ने कभी नाले किनारे जाकर हकीकत नहीं जानी। मशीन तो छोड़िए मेद्य की दीवार के पीछे ना ले किनारे पैदल भी नहीं चल सकते। बड़ी-बड़ी झाड़ियां हैं। केमिकलयुक्त और सीवेज बहने के कारण यहां दुर्गंध से बुरा हाल रहता है। ऐसे में बिना नाले का समाधान किए चौपाटी बनाना जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। पार्षदों ने कहा कि इस क्षेत्र के लोग आदर्श नाला चाहते थे, न कि चौपाटी । मेडा ने इस प्रोजेक्ट पर पार्षदों से राय नहीं ली । मनमानी तरीके से दीवार खड़ी कर दी। दीवार बनाने से पहले अधिकारियों ने यह भी नहीं सोचा कि सफाई कैसे होगी। एक तरफ सेना की तारबंदी है और दूसरी तरफ दीवार। बीच में नाला बह रहा है। जब मशीन जाने का रास्ता नहीं दिया तो सफाई कैसे होगी।
अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी का कहना है कि नाले का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। कहां कितनी जगह मेडा ने छोड़ी है। सफाई का रास्ता कितना है। नया रास्ता कैसे बनेगा। नाले की तलहटी में चौपाटी का कचरा न आए, इसका क्या प्रबंध किया है। इन सभी बिंदुओं पर मेडा अधिकारियों से बात की जाएगी। नाले की सफाई निगम करता है। यह देखते हुए मेडा को निगम से दीवार खड़ी करने से पहले एनओसी लेनी चाहिए थी। कमिश्नर का निर्देश भी है कि कोई भी काम करने से पहले विभाग उस संबंधित विभाग को जानकारी जरूर दें जिसके क्षेत्र में काम कर रहे हों। अनुमति लेकर ही काम करें, ताकि बाद में कोई समस्या न हो।
