Monday, March 16

मंडलायुक्त जी मेडा के अफसरों के चश्मों का नंबर बदलवाईये, इन्हें हर अवैध निर्माण मानचित्र के अनुसार कैसे नजर आ रहा है, मुख्यमंत्री पोर्टल पर आई शिकायतों का कर रहे हैं फर्जी निस्तारण, हल्दीराम गढ़ रोड और तरूण गुप्ता पल्लवपुरम के निर्माण को देखा जा सकता है।

Pinterest LinkedIn Tumblr +

मेरठ, 16 मार्च (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। आम आदमी को नौ प्रोफेट नौ लास का घर और व्यवसाय के लिए प्लाट व मकान व दुकान उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से सरकार द्वारा विकास प्राधिकरणों का गठन किया गया। लेकिन अब वर्तमान में इन प्राधिकरणों के इस कार्य से संबंध अफसर और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली देखकर यह लगता है कि यह विभाग और इनके अफसर मुख्य उद्देश्य को भूल ही गये है अपना बैंक बैलेंस बढ़ाने के चक्कर में। माननीय मुख्यमंत्री जी वर्तमान में जितना नजर आ रहा है विकास प्राधिकरणों मेडा आदि के इस काम के लिए जिम्मेदार अफसर और कर्मचारी शायद अपनी तैनाती इनमें और इनमें भी कमाऊ क्षेत्र में इसलिए कराते हैं कि ऐशपरस्ती के साधन और धन संपत्ति जुटाई जा सके वरना जिस प्रकार से शहर की सीमाओं में अवैध निर्माण आदि बढ़ रहे हैं वह नहीं बढ़ते। उदाहरण के रूप मंे माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा सरकार की इस संदर्भ में बनाई गयी योजनाओं और निर्माणनीति का पालन कराने हेतु जो जन शिकायत पोर्टल बनाया गया है उस पर जितनी भी अवैध निर्माण या कच्ची कालोनियों अथवा सरकारी जमीन घेरे जाने की शिकायत की जाती है उनमें से ज्यादातर का निस्तारण अवैध निर्माण रोकने से संबंध मेडा के अधिकारी मानचित्र पास है बताकर फर्जी तरीके से कर देते हैं। ना तो वह यह देखते हैं कि मानचित्र सही पास हुआ या नहीं, किसी चीज का कितनी जमीन पर और क्या-क्या बनाये जाने का नक्शा पास हुआ और मौके पर क्या-क्या बना हुआ हैं, तथा सरकार की निर्माण नीति का पालन हो रहा है या नहीं यह देखे बिना सिर्फ मानचित्र पास है लिखकर जो निस्तरण किये जा रहे हैं इनके द्वारा वह अवैध निर्माण कच्ची कालोनियों और भूमाफियाओं को बढ़ावा दे रहे हैं जानकारों के अनुसार।

वीसी साहब इसका जीता जागता उदाहरण देखना है तो पीएस अर्केड गढ़ रोड के शोरूम, पल्लवपुरम में फेस वन में कैलाश हलवाई के बराबर में तरूण गुप्ता द्वारा रिहायशी प्लाट पर अवैध कॉमर्शियल निर्माण करने के साथ ही अप्रोच रोड पर भी दुकानें बना दी गयी सरकारी जमीन घेरकर जो 4.5 मीटर का फ्रंट छोड़ा जाना वह तो दूर नियम विरूध बेसमेंट भी बनाया गया निर्माण पर सील भी लगी और शायद कागजों में अभी भी लगी हो लेकिन विभाग के अधिकारी खानापूर्ति कर ऐसे निर्माणों को बचाने में लगे हैं। जानकारों का यह कहना सही लगता है कि सरकार की निर्माणनीति के विपरीत होने वाले निर्माणों से जो लाभ इन्हें प्राप्त हो रहे हैं उसकी चमक-धमक में यह सरकार की मंशा और नियमावली तथा मुख्यमंत्री के निर्देशों और आदेशों का भी भूल गये है और पता नहीं ऐसा कौन सा चश्मा चढ़ा लिय है कि इन्हें हर निर्माण सही नजर आता है। वीसी साहब सरकार की योजनाओं और माननीय मुख्यमंत्री जी की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इनके चश्मे का नंबर बदलवाईये वरना ये जो आपके जोन बनाए गए है उनमें तैनात अवैध निर्माण रोकने से संबंध अफसर इसे अब विकसीत और ईंट रोड़े का जंगल ही बनाकर छोड़ेंगे। सरकार के हित मंे कमिश्नर साहब और वीसी साहब दें ध्यान।

Share.

About Author

Leave A Reply