Sunday, April 14

चार धाम से संबंध सिलक्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने में सफल सभी का आभार, भविष्य में कोयला खानों और ऐसे कार्यों में ली जाए रोबटों की मदद

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उत्तराखंड़ प्रदेश के उत्तरकांशी चारधाम यात्रा मार्ग पर सुरंग के भीतर फंसे 41 श्रमिकों के बाहर निकलने का मार्ग आज 13वें दिन जानकारों के अनुसार लगभग साफ हो ही गया। इन बीते दिनों में उसमें फंसे मजदूरों की क्या स्थिति रही होगी इसका वर्णन तो बाहर आने और अपने आपको सुरक्षित महसूस करने के उपरांत पीड़ित ही सही मायनों में कर सकते है। लेकिन चरणबंद्ध तरीके से बचाव कार्यों में लगे इंजीनियरों आदि ने जो प्रयास किये उन सहित सुरंग को आवागमन के लिए सक्षम बनाने में टचलेंस कंपनी के दो एक्सपर्ट बलबिन्दर सिंह और प्रवीण बचाव कार्यों के हीरो बनकर सामने आये है क्योंकि इनके द्वारा कई कठिन परिस्थितियों को दूर कर श्रमिकों के बाहर आने का रास्ता साफ किया गया। सुरंग में फंसे मजदूरों को जल्द से जल्द बाहर निकालने के लिए ग्रीन कॉरीडोर बनाकर जिस प्रकार से ऐतिहासिक समय में सुरंग तक मशीनों को भेजा गया वो भी काबिले तारीफ है। क्योंकि 75 किलोमीटर का ग्रीन कॉरीडोर बनाया गया था जिस कारण जल्द जल्द मशीने मौके पर पहुंची। और मजदूर भाईयों के बाहर निकलने की संभावनाऐं बनी तथा 12वें दिन उनके द्वारा ब्रुश भी किया गया और कपड़े भी बदले गये जिससे उन्हें राहत का अहसास हुआ होगा कि जल्दी ही अब वो इस कठिनाई से मुक्त हो सकते है। इस बचाव कार्य में सड़क परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी के प्रयासों से बचाव के काम में तेजी आई तो उत्तराखंड़ के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मौके पर पहुंचकर उनका हौंसला बढ़ाया और काम में तेजी लाने के निर्देश तो दिये ही इस कार्य में कोई भी बाधा उत्पन्न न हो ये भी कहा। और सबसे बड़ी बात वीआईपी द्वारा ऐसे कठिन समय में आवाज देकर मजदूरों को संबोधन करना कि गब्बर जी हम बहुत पास है सब जल्दी ही बाहर होंगे। बड़ी बात यह है कि क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी निरंतर बचाव कार्यों का अपडेट ले रहे थे तथा विशेषज्ञों की मदद इस काम में ली जा रही थी। इसलिए देर से ही सही सब श्रमिक सकुशल बाहर आयेंगे यह उम्मीद होना बड़ी बात है। बताते चले कि बीती 12 नवंबर को सिलक्यारा सुरंग में मलबा भर जाने से उसमें यह श्रमिक फंसे। और जितना संभव हो सकता था खबरों से पता चला कि उनकी मदद करने में कोतांही नहीं बरती गई। अच्छी बात है यह कि अब भारतीय राष्ट्रीय राज मार्ग प्राधिकरण एनएचआई सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पालन करने के लिए देश भर में ऐसी 38 निर्माणाधीन सुरंगों का सुरक्षा आडिट करने जा रहा है। अब तो बस इन सभी श्रमिकों के सकुशल बाहर आने की खुशखबरी का ही इंतजार है। लेकिन जितना संभव हो पा रहा है इस काम में लगाये गये चिकित्सक भी अपनी जिम्मेदारी का पालन पूरी तौर पर कर रहे बताते है। तो देश का हर संवेदनशील नागरिक श्रमिकों के स्वस्थ रहने और बाहर आने की कामना पहले दिन से ही कर रहा है। बताते है कि इतने दिन सुरंग में फंसे रहने के चलते उन्हें बाहर निकलने में कष्ट न हो इसके लिए एनडीआरएफ के महानिदेशक अतुल करवाल के अनुसार उनके बलके कर्मी निकासी के लिए पूरी तौर पर तैयार है। तथा इस श्रमिकों को पहियेदार स्टेचर पर बैठाकर बाहर निकाला जाएगा।
इस पूरे प्रकरण में मजदूरों के परिवार और फंसे श्रमिक प्रसन्न चित और स्वस्थ बाहर निकले परम पिता परमात्मा से यह कामना करते हुए मैं इस कार्य में मदद हेतु लगे सभी लोगों का आभार व्यक्त करने के साथ ही सरकार ने जो इस काम में प्राथमिकता दिखाई वो भी प्रशंसा योग्य है। मगर एक बात जरूर कहना चाहता हूं कि इस प्रकार की बनने वाली सुरंगों और कोयला खानों आदि में अब मानवों की बजाए प्रथम चरण में रोबट भेजे जाए जिससे किसी के भी जान माल की हानि होने की संभावनाऐं भविष्य में नगण्य हो सके। और जितना देखने और सुनने को मिल रहा है उसे देखकर यह कहा सकता हूं कि हर क्षेत्र में अपना काम कर रहे रोबट इस जिम्मेदारी को भी पूरी तौर पर पूर्ण करने में सक्षम सिद्ध होंगे और जो कमी होगी वो हमारे इन्हें तैयार करने में लगे वैज्ञानिक इन्हें दूर कर देंगे ये बात विश्वास से कही जा सकती है।
प्रस्तुतिः अंकित बिश्नोई पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए के राष्ट्रीय महामंत्री संपादक

 

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