मेरठ 17 अप्रैल (प्र)। देश की पहली रीजनल रैपिड ट्रांजिट ट्रेन नमो भारत और मेरठ सेंट्रल स्टेशन यानी भूडबराल मोदीपुरम स्टेशन के बीच संचालित होने वाली देश की सर्वाधिक स्पीड वाली मेरठ मेट्रो में सुबह व शाम को भीड़ रहती है, लेकिन दोपहर को दोनों ट्रेनों में चंद यात्री नजर आते हैं।
दिल्ली और गाजियाबाद में मल्टीनेशनल या बड़ी स्वदेशी कंपनियों के कर्मचारियों को नमो भारत का सफर भा रहा है। यह ट्रेन युवाओं की पसंद बनी गई। सुबह में समय पर दफ्तर पहुंचने के लिए कर्मचारी नमो भारत का सफर कर रहे हैं। उधर, मेरठ मेट्रो दिन में किसी भी समय फुल नहीं हो पा रही। इस ट्रेन की अधिकांश सीटें हर ट्रिप में खाली रहती हैं।
दरअसल, 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली के सराय काले खां स्टेशन से मोदीपुरम स्टेशन के बीच 82 किमी लंबे देश की पहली रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के पूरे कॉरिडोर पर नमो भारत ट्रेन के संचालन को लोकार्पण किया था। इसी के साथ मेरठ साउथ स्टेशन से मोदीपुरम स्टेशन के बीच मेरठ मेट्रो को भी हरी झंडी दिखाई थी। इसी दिन शाम छह बजे दोनों ट्रेनों का पब्लिक के लिए संचालन शुरू कर दिया गया था। एक माह तक दोनों ट्रेनें लोगों के कोतुहल का विषय बनी रहीं। करीब 50 दिनों में लाखों यात्रियों ने इन ट्रेनों का सफर किया। दिल्ली, गाजियाबाद या नोएडा में मल्टीनेशनल कंपनियों और अन्य बड़ी कंपनियों में नौकरी करने वालों को नमो भारत ट्रेन पसंद आई, जबकि हजारों लोग अभी भी रोजाना यूपी रोडवेज की बसों या ट्रेनों का सफर पसंद कर रहे हैं, इसकी एक वजह है रोडवेज बस का किराया कम होना और दूसरी वजह है बसों का रूट पर जगह-जगह रुककर यात्रियों को लेकर चलना।
दिल्ली गाजियाबाद व नोएडा नौकरी करने वालों की सुबह में भीड़ नजर आती है, जबकि दोपहर में नमो भारत में लगभग आधी सीटें खाली हो जाती है। उधर, मेरठ मेट्रो में सर्वाधिक यात्री बेगमपुल स्टेशन से उतरते और चढ़ते हैं। मेट्रो में मेन ट्रैफिक बेगमपुल से शताब्दीनगर स्टेशन के बीच रहता है। इसमें मोहकमपुर, परतापुर, रिठानी, उद्योगपुरम, ऐपेक्स इंडस्ट्रीयल एस्टेट में लगे उद्योगों और वाहनों के शोरूम के बड़ी संख्या में कर्मचारी सफर करते हैं। वे सुबह को अपनी फैक्ट्री या शोरूम पर जाते हैं और शाम को वहां से लौटते हैं। इसलिए सुबह व शाम में मेरठ मेट्रो में अधिकांश सीटें भर जाती हैं, लेकिन दोपहर में मेरठ मेट्रो की लगभग 70 प्रतिशत सीटें खाली रहती हैं और ये ट्रेन इधर से उधर चक्कर लगाते हुए नजर आती हैं।
मेरठ मेट्रो का यात्रियों पर आकर्षण कम होने की वजह है, इसका केवल एक रूट यानी दिल्ली रोड़ पर संचालन होना। इसके अलावा मेरठ मेट्रो को पकड़ने के लिए यात्रियों को स्टेशनों पर उतरना चढ़ना पड़ता है, बड़ी संख्या में लोग एस्केलेट व लिफ्ट में चढ़ने से डरते हैं, उन्हें सौ से अधिक सीढ़ियों को चढ़ने उतरने में खासी दिक्कत होती है। इसके अलावा ट्रेन का इंतजार भी करना, जबकि महानगर में ई रिक्शाओं की बाढ़ है। हर जगह के लिए ई-रिक्शा मिल जाती है। वे यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं और कम किराए में इसलिए लोगों का ई-रिक्शों से मोह भंग नहीं हो पा रहा। हालांकि एनआरसीटीसी के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उनकी उम्मीद से अधिक यात्री नमोभारत व मेरठ मेट्रो का सफर कर रहे हैं।
ये हैं मेरठ में नमो भारत और मेट्रो के स्टेशन
मेरठ साउथ (भूडबराल) नमो भारत मेट्रो।
परतापुर पर सिर्फ मेट्रो ।
रिठानी पर सिर्फ मेट्रो।
शताब्दीनगर पर नमो भारत व मेट्रो।
ब्रह्मपुरी (ट्रांसपोर्टनगर) पर सिर्फ मेट्रो।
मेरठ सेंट्रल (फुटबाल चौक), सिर्फ मेट्रो।
भैसाली पर सिर्फ मेट्रो।
बेगमपुल पर नमो भारत व मेट्रो।
एमईएस पर सिर्फ मेटो।
डोरली पर सिर्फ मेट्रो ।
मेरठ नार्थ (बाईपास मोड़ पर सिर्फ मेट्रो।
मोदीपुरम पर नमो भारत व मेट्रो ।
मोदीपुरम डिपो पर सिर्फ मेट्रो।
