Friday, August 29

धनखड़ का ‘स्वास्थ्य कारणों’ से इस्तीफा, उपराष्ट्रपति ने कार्यकाल के बीच में पद छोड़ा

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नई दिल्ली 22 जुलाई। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार रात अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेजे त्यागपत्र में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए कहा कि वह तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं। धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने राष्ट्रपति को सौंपे इस्तीफे में प्रधानमंत्री, मंत्रि परिषद और सभी सांसदों के सहयोग के लिए आभार प्रकट किया है। इससे पहले राज्यसभा के सभापति मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को राज्यसभा में मौजूद रहे। उन्होंने सदन की कार्यवाही का संचालन भी किया।

74 वर्षीय जगदीप धनखड़ दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं। मार्च में वह एम्स में इलाज के लिए भर्ती हुए थे। तब उनकी एंजियोप्लास्टी की गई थी, उसके बाद वे ठीक थे। अप्रैल में भी वे सदन में आए थे। जब सोमवार को वे सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे थे तो किसी को अहसास नहीं था कि वे इतने बीमार हैं कि इस्तीफा दे सकते हैं।

धनखड़ उपराष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल में राज्यपाल थे। अगस्त 2022 में उन्हें उपराष्ट्रपति बनाया गया था। उनका करीब दो वर्ष का कार्यकाल बचा हुआ था। ऐसे में अचानक उनके इस्तीफे पर सवाल उठ रहे हैं।

राष्ट्रपति को पत्र में क्या लिखा
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने त्याग पत्र में लिखा- माननीय राष्ट्रपति जी… सेहत को प्राथमिकता देने और डॉक्टर की सलाह को मानने के लिए मैं संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार अपने पद से इस्तीफा देता हूं। मैं भारत के राष्ट्रपति में गहरी कृतज्ञता प्रकट करता हूं। आपका समर्थन अडिग रहा, जिनके साथ मेरा कार्यकाल शांतिपूर्ण और बेहतरीन रहा। मैं प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के प्रति भी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री का सहयोग और समर्थन अमूल्य रहा है और मैंने अपने कार्यकाल के दौरान उनसे बहुत कुछ सीखा है। माननीय सांसदों से मुझे जो स्नेह, विश्वास और अपनापन मिला है, वह मेरी स्मृति में हमेशा रहेगा।

महान लोकतंत्र में काम करने का मौका मिला: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पत्र में लिखा कि मैं इसके लिए आभारी हूं कि मुझे इस महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति के रूप में जो अनुभव और ज्ञान मिला, वह अत्यंत मूल्यवान रहा। यह मेरे लिए सौभाग्य और संतोष की बात रही है कि मैंने भारत की अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति और इस परिवर्तनकारी युग में उसके तेज विकास को देखा और उसमें भागीदारी की।

हमारे राष्ट्र के इतिहास के इस महत्वपूर्ण दौर में सेवा करना मेरे लिए सच्चे सम्मान की बात रही। आज जब मैं इस पद को छोड़ रहा हूं, मेरे दिल में भारत की उपलब्धियों और शानदार भविष्य के लिए गर्व और अटूट विश्वास है।

आगे क्या
अगर राष्ट्रपति इस्तीफा स्वीकार कर लेती हैं, तो उपराष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाएगा। इसके बाद चुनाव किया जाना अनिवार्य होगा। हालांकि, संविधान में इसके लिए कोई समयसीमा निर्धारित नहीं है (जैसे कि राष्ट्रपति के लिए छह महीने), लेकिन आमतौर पर यह जितनी जल्दी हो सके, किया जाता है। पद खाली रहने पर राज्यसभा के उपसभापति सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं।

दिल्ली एम्स में हुए थे भर्ती
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 25 जून को उत्तराखंड में एक कार्यक्रम में थे। इसी दौरान उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई थी। धनखड़ को 9 मार्च 2025 को अचानक सीने में दर्द की शिकायत पर एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया था। इस्तीफे में भी उन्होंने स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने का हवाला दिया है।

विपक्ष के निशाने पर रहे
राज्यसभा के सभापति के तौर पर कार्य करते हुए धनखड़ अपने मुखर स्वभाव के कारण सुर्खियों में रहे। वे विपक्ष के निशाने पर रहे। नाराज विपक्ष ने पिछले साल उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया था, जो बाद में खारिज हो गया था। विपक्ष के साथ उनके टकराव को लेकर सत्ता पक्ष भी सहज नहीं था।

राजस्थान से राज्यसभा सभापति तक का सफर
● उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू के किथाना गांव में हुआ
● जयपुर के महाराजा कॉलेज से भौतिक विज्ञान में स्नातक हैं। वर्ष 1978-79 में राजस्थान यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया
● 10 नवंबर 1979 से बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के सदस्य रहे।
● वर्ष 1989 में झुंझुनू से सांसद बने थे। 1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे।
● जगदीप धनखड़ को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 30 जुलाई 2019 को बंगाल का 28वां राज्यपाल नियुक्त किया था। 22 जुलाई 2022 तक पद पर बने रहे।

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