Tuesday, June 18

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीत भले ही भाजपा को मिली हो वोट कांग्रेस ने ज्यादा पाए

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सेवानिवृत आईपीएस जेडपीएम नेता लालडुहोमा द्वारा गठित जेडपीएम पार्टी ने 40 सीटों वाली विधानसभा मिजोरम में 27 सीटें जीतकर अपनी विजय का परचम फहराया। इसके साथ ही बीते दिनों पांच राज्यों में हुए चुनावों के बाद अब वहां सरकार बनाने का कार्य जोरशोर से शुरू हो गया है।
भाजपा चुनाव नतीजों से अत्यंत उत्साहित है तो कांग्रेस हार के कारणों की समीक्षा में लगी है। और अन्य विपक्षी दल इन चुनाव परिणामों को कांग्रेस के अहम और सही निर्णय ना लेने को दोषी ठहरा रहे हैं। पीएम मोदी का कहना है कि हार का गुस्सा छोड़ विपक्ष आगे बढ़े। पराजय का गुस्सा संसद में ना उतारे। उनका कहना है कि यह चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव का संदेश है।
दूसरी तरफ हार के बाद कहां कमी रही यह सोचने और भविष्य में चुनाव परिणामों को बदलने की बजाय यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री सपा के राष्टीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि चुनाव परिणामों ने कांग्रेस का अहंकार तोड़ा तो यूपी की पूर्व सीएम बसपा की राष्टीय अध्यक्ष मायावती का कहना है कि चार राज्यों के चुनाव परिणाम विचित्र व रहस्यमयी है। दूसरी तरफ एक तरफ तो गठबंधन के कुछ नेता कह रहे हैं कि विधानसभा चुनावों के नतीजों का असर इंडिया गठबंधन पर नहीं होगा लेकिन यह किसी से छिपा नहीं है कि इन चुनावों के बाद हार को लेकर यूपी में इंडिया एलाइंस में जो आरोप प्रत्यारोप का खेल शुरू हुआ है वो थमने का नाम नहीं ले रहा है। खासकर गठबंधन के सदस्य विपक्षी दल कांग्रेस को निशाने पर लेने की कोशिश कर रहे हैं और अब तो यह आवाज भी दबे रूप में उठने लगी है कि कौन कितनी लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगा। यह बंटवारा होना चाहिए। लेकिन अगर इस खबर पर ध्यान दिया जाए कि पांचों चुनावी राज्यों में कांग्रेस को भाजपा से अधिक वोट प्राप्त हुए तो आम आदमी को आश्चर्य जरूर हो सकता है। मगर एक समाचार पत्र में पांचों चुनावी राज्यों में कांग्रेस को भाजपा से अधिक वोट शीर्षक से छपी यह खबर पांचों राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में भले ही भाजपा भारी बहुमत से तीन राज्यों में जीत दर्ज करने में सफल रही हो, लेकिन इन चनावों में कुल मत कांग्रेस को ज्यादा मिले हैं। भारतीय निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, कांग्रेस को भाजपा से करीब 10 लाख मत ज्यादा मिले हैं। इसके पीछे की मुख्य वजह तेलंगाना में कांग्रेस को मिली शानदार जीत होना है।
निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा को पांचों राज्यों में कुल (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलांगना और मिजोरम) में 4 करोड़ 81 लाख 68 हजार 687 मत मिले। जबकि, कांग्रेस को इन राज्यों में कुल 4 करोड़ 92 लाख 24 हजार मत मिले।
इस हिसाब से कांग्रेस को 10 लाख 55 हजार 313 मत अधिक मिले। दरअसल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा को प्रचंड जीत मिली, लेकिन मतों का अंतर बहुत ज्यादा नहीं रहा। लेकिन, तेलंगाना में कांग्रेस को भारी जीत मिली। यहां पर भाजपा तीसरे नंबर पर रही। यही वजह है कि पांचों राज्यों में मिले वोटों को जोड़ने पर कांग्रेस भाजपा से आगे निकल गई।
छत्तीसगढ़
90 विधानसभा वाली छत्तीसगढ़ में भाजपा 72 लाख 34 हजार 968 वोट यानी 46.37 फीसदी वोट पाकर 54 सीटें जीतने में कामयाब रही। जबकि कांग्रेस महज 35 सीटें जीत पाई।
राजस्थान
199 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में राजस्थान में भाजपा को 1 करोड़ 65 लाख 24 हजार 789 वोट यानी 41.65 फीसदी वोट मिले। भाजपा ने कुल 115 सीटों पर जीत प्राप्त की।
तेलंगाना
119 विधानसभा सीट वाले तेलंगाना में कांग्रेस 92 लाख 35 हजार 792 वोट यानी 35.40 फीसदी वोट पाकर 64 सीटें पाई। जबकि यहां पर भाजपा को 32 लाख 57 हजार 511 यानी 13.90 फीसदी वोट मिले। भाजपा को महज 8 सीटें मिलीं। यहां पर भाजपा तीसरे स्थान पर रही।
मध्य प्रदेश
230 विधानसभा सीट वाले मध्य प्रदेश में भाजपा 2 करोड़ 11 लाख 16 हजार 157 वोट यानी 48.55 फीसदी वोट पाकर 163 सीटें जीतने में कामयाब रही।
मिजोरम
40 विधानसभा सीट वाले इस राज्य में 1 लाख 46 हजार 113 वोट यानी 20.82 फीसदी वोट पाकर कांग्रेस को एक सीट पर जीत मिली है। जबकि भाजपा 35 हजार 524 यानी 05.06 फीसदी वोट पाकर दो सीटें जीतने में कामयाब रही है।
इसलिए कांग्रेस और उसके नेताओं व कार्यकर्ताओं को ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। मेरी निगाह में 2024 के चुनाव में अगर महिलाओं और युवाओं को कांग्रेस आगे लाए और जनाधार वाले लोगों को ही टिकट दे तो यह बात विश्वास के साथ कही जा सकती है कि चुनाव परिणाम 2024 में कुछ भी रहे शेयर बाजार किसी की जीत पर भी झूमे मगर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के चेहरे पर चमक लौटकर आ सकती है। अगर पांच दशक की चुनावी राजनीति को देखें तो कई बार ऐसे झटके आए हैं कि सत्ताधारी पार्टी बिल्कुल बाहर और विपक्ष सत्ता पर काबिज हुआ है। कहते है कि राजनीति हमेशा खेल भावना से ही सही होती है। इसलिए इंडिया गठबंधन के नेता कांग्रेस को कोसना बंद कर राहुल गांधी के नेतृत्व में इकटठा होकर आगे बढ़ें। भविष्य और परिणाम सकारात्मक ही होंगे।

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