Wednesday, April 8

2023 में पास की परीक्षा, सीसीएसयू ने दी 2022 की डिग्री

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मेरठ 08 अप्रैल (प्र)। तमाम उपलब्धियों के ‘बावजूद चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में छात्रों से जुड़ी व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पा रही है। एक ताजा मामले में जोगेंद्र ने वर्ष 2023 में एमए फाइनल परीक्षा पास की लेकिन विश्वविद्यालय ने उसे 2022 की डिग्री थमा दी है। डिग्री के लिए जोगेंद्र ने अगस्त 2025 में आवेदन किया था. उसे जनवरी 2026 में भेजी गई। मामले को लेकर मंगलवार को छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक का घेराव किया।

पूर्व छात्र संघ महामंत्री अंकित अधाना ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि डिग्री के सत्यापन और डिस्पैच से पहले कोई क्रास चेकिंग नहीं हो रही है। इससे छात्रों के पते तक गलत डिग्रियां पहुंच रही हैं। डिग्री में ऐसे भी मामले आए हैं, जब एक ही डिग्री दो-दो बार अलग-अलग सीरियल नंबर के साथ मिली है। छात्रों ने गोपनीय विभाग में कर्मचारियों के समय पर न बैठने और खिड़कियों से नदारद रहने का मुद्दा भी उठाया। छात्रों ने डिग्री पर उत्तीर्ण वर्ष गलत होने के मामले में जांच समिति गठित करने की मांग की। परीक्षा नियंत्रक वीरेंद्र कुमार मौर्य ने कहा कि डिग्री की जांच कर संशोधित डिग्री जारी की जाएगी।

प्रिंटिंग में अटकी डिग्री
छात्रों को डिग्री व मार्कशीट के लिए भटकना न पड़े इसलिए विश्वविद्यालय ने आनलाइन पोर्टल शुरू किया। छात्रों ने आवेदन किए और विभागीय प्रक्रिया के बाद जब डिग्री प्रिंटिंग के लिए पहुंच रही तो कहां अटक रही है। प्रिंटिंग कंपनी 15 दिन से पहले डिग्री छाप ही नहीं रही है। 15 दिन में छपने के बाद भी एक से डेढ़ महीने तक छात्रों को नहीं मिल रही है।
छात्रों ने कहा कि दरोगा भर्ती के अभ्यर्थियों के लिए विशेष व्यवस्था की जाए ताकि साक्ष्य के साथ आवेदन करने पर उन्हें तत्काल डिग्री उपलब्ध हो सके। भर्ती के लिए लिखित परीक्षा में सफल होने वाले हर अभ्यर्थी के कागजातों का वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है।

परीक्षा दो महीने पहले हो रही तो कैसे पूरी होगी अटेंडेंस
सीसीएसयू की और से कुछ परीक्षाएं बुधवार आठ अप्रैल तो एनईपी के तहत यूपी-पीजी की परीक्षाएं 11 अप्रैल को शुरू कराई जा रही हैं। विश्वविद्यालय के छात्र जून की परीक्षा अप्रैल में कराए जाने का लगातार विरोध कर रहे हैं। ऐसे में मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में अर्थशास्त्र सहित कुछ विभागों में अटेंडेंस कम होने पर विद्यार्थियों को आंतरिक परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया। इसके विरोध में छात्र नेता अक्षय बैंसला की अगुवाई में छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक से शिकायत दर्ज कराई। कहा कि जून तक कक्षाएं चलतीं तो विद्यार्थियों की अटेंडेंस स्वत: पूरी हो जाती। अब जब परीक्षा ही दो महीने पहले हो रही है तो 75 प्रतिशत अटेंडेंस किस तरह से पूरी होगी। परीक्षा नियंत्रक ने डीन साइंस से विमर्श कर छात्रों को राहत देने का आश्वासन दिया है।

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