फिल्म घूसखोर पंडत को लेकर धीरे-धीरे देशभर में विवाद शुरू होने की सुगबुगाहट शुरू हो गयी है जबकि फिल्म निर्माता नीरज पांडे और मनोज वाजपेयी दोनों ही ब्राहम्ण समाज से संबंध हैं और पंडत की श्रेणी में आते हैं मगर किसी को भी समाज की ठेकेदारी करने आ अपने आप को उससे ज्यादा समझने का कोई अधिकार नहीं है मेरा मानना है कि झारखंड के गोंडा से 4 बार के सांसद संचार और सूचना प्रौद्यागिकी के स्थाई समिति के अध्यक्ष भाजपा सांसद नीशिकांत दुबे को इस मामले में सोचने पर ज्यादा समय नहीं लगाना चाहिए क्योंकि लखनऊ के थाने में घूसखोर पंडत को लेकर मुकदमा भी दर्ज हो चुका है और संबंधित को नोटिस भी दिया गया है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ब्राह्मण समुदाय से ही संबंध फिल्म निर्माता और अभिनेता के द्वारा सम्मानित ब्राह्मण समाज का अपने कथन से अपमान किया गया है उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती जी ने भी कहा कि ब्राह्मणों का अपमान करने वाली फिल्म घूसखोर पंडत पर भी प्रतिबंध लगे। मुझे लगता है कि यह विवाद और बढ़े उससे पूर्व अपने बयान में यह कहने वाले मनोज वाजपेयी का कहना है कि लोगों द्वारा साझा की गयी भावना और चिंताओं का सम्मान करता हूं और इन्हें गम्भीरता से लेता हूं उन्हें चाहिए कि वह खुद और फिल्म निर्माता नीरज पांडे घूसखोर पंडत शीर्षक को लेकर शुरू हुई सुगबुगाहट को समाप्त करने के लिए वह और फिल्म निर्माता नीरज पांडे माफी मांगे तथा शीर्षक घूसखोर पंडत को हटाने के साथ ही फिल्म से भी इस शब्द को बाहर निकाला जाए।
केन्द्र सरकार के फिल्म संेसर बोर्ड के अध्यक्ष और दूरसंचार मंत्रालय के उच्चाधिकारी व मंत्री इस फिल्म पर प्रतिबंध की घोषणा कर देश में अमन चैन और शांति बनाये रखने की पहल करें।
प्रस्तुति:- मजीठियां बोर्ड यूपी के पूर्व सदस्य सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए के राष्ट्रीय महामंत्री, संपादक पत्रकार अंकित बिश्नोई
