Tuesday, December 5

फोटोवीर माफियाओं का महिमामंडन ?

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मेरठ 27 सितंबर (विशेष संवाददाता)। जैसे जैसे हर क्षेत्र में व्यवस्था भागमभाग और व्यवस्था बढ़ रही है वैसे वैसे जनसामान्य की मदद करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय निस्वार्थ सेवाभावी लोगों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। यह आए दिन होने वाले सार्वजनिक धार्मिक शैक्षिक और दूसरों की मदद के लिए कार्यक्रमों में देखने को मिल सकता है। मगर इसी क्रम में काम कम चेहरा ज्यादा चमकाने की जुगाड़़ में लगे रहने वाले कुछ फोटोवीर भी काफी सक्रिय नजर आते हैं। इस संदर्भ में निस्वार्थ भाव से काम करने वाले उन लोगों में विशेष चर्चा है कि कुछ शिक्षा और भूमाफिया तथा अवैध निर्माणकर्ता औरों के द्वारा आयोजित कार्यक्रमों मेें जाकर जो काम करते हैं। उन्हें पीछे हटाकर खुद जब फोटों खींचते हैं तो वीआईपी की बगल में जाकर खड़े हो जाते हैं। कुछ समाज के प्रति समर्पित नागरिकों में व्याप्त यह चर्चा आज के समाचार पत्रों मे भी देखने को मिली क्योंकि गत दिवस एक्सिस बैंक द्वारा सरधना में बिनौली रोड पर और शहर में सुरजकूंड पर शाखा का शुभारंभ किया गया जिसका उदघाटन जिलाधिकारी दीपक मीणा ने किया। यहां एक अघोषित भूमाफिया और अवैध निर्माण कर्ता फोटो खींचते समय सबसे आगे आकर खड़ा हो गया। उसी प्रकार 13 संवासिनियों की शासन स्तर पर कराई गई शादी में आयोजित कार्यक्रम में वेस्ट एंड रोड पर अवैध रूप से निर्मित एक स्कूल का संचालक फोटो खिंचाने सबसे आगे आकर खड़े हो गए।

इन चित्रों को देखकर नागरिकों में विशेष चर्चा रही कि आखिर यह माफिया फोटों खींचने के समय अग्रिम पंक्ति में कैसे पहुंच जाते हैं और इनका सहयोग कौन करता है। जो भी हो इन फोटोवीरों से हर क्षेत्र में निस्वार्थ काम करने वाले लोग काफी परेशान बताए जाते हैं लेकिन चर्चा है कि अपनी अवैध कमाई से जो खर्चा यह करते हैं उसके कारण कोई बोल नहीं पाता। बताते चलें कि पूर्व में सीएम जब मेरठ आए और काली पलटन मंदिर में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक का प्रवेश पास नहीं बना था उस समय एक अपराधी के साथ प्रकरण में चर्चित शिक्षामाफिया वहां अंदर मौजूद था वो कैसे पहुंचा यह भी चर्चा का विषय था। कुछ लोगों का कहना था कि वो घंटो पूर्व वहां जाकर बैठ गया था तो कई का कहना था कि मंदिर समिति का एक पदाधिकारी या कार्यकारिणी सदस्य उसे अपने साथ ले गए थे। जो भी हो चूक तो थी ही।
इतना ही नहीं कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि दूर दूर तक स्वतंत्रता संग्राम आदि से संबंध ना होने के बावजूद यह शिक्षामाफिया अपने अनैतिक कार्यों से कमाए धन बल के दम पर ही शायद स्वतंत्रता सेनानियों से संबंध कार्यक्रमों में भी सम्मानित हो जाता है। कुछ प्रमुख नागरिकों में होने वाली चर्चा अनुसार ऐसे लोगों का महिमा मंडन करने और जुगाड़ से इनके हो जाने पर रोक लगनी ही चाहिए।

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