मुजफ्फरनगर 28 अगस्त। खालापार पुलिस ने फर्जी ई-वे बिल और अन्य कागजातों के आधार पर 1300 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी किए जाने का मामला पकड़ा है। दो आरोपी गिरफ्तार किए हैं। फर्जी ई-वे बिल, कागजात तैयार करने में प्रयुक्त लैपटॉप, प्रिंटर, मोबाइल, फर्जी मुहर, धर्मकांटे की फर्जी पर्ची अन्य फर्जी दस्तावेज बरामद किए। सरगना अभी फरार है।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली कि जेडके काम्प्लेक्स में कुछ लोग फर्जी फर्मों के बिल व फर्जी जीएसटी बिल व धर्मकांटों की फर्जी रसीदों से ई-वे बिल तैयार कर जीएसटी चोरी कर रहे हैं। पुलिस ने बुधवार सुबह छापेमारी की और मोहम्मद नदीम निवासी मेरठ और मोहम्मद समीर निवासी मुजफ्फरनगर को गिरफ्तार किया।
आरोपितों ने बताया कि वे शादाब के लिए काम करते हैं। शादाब अक्शा रिसाइक्लिंग एंड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड नाम से फर्म चलाता है। शादाब ई-वे बिल भेजता है, जबकि वे दोनों कंपनियों से संपर्क में रहते हैं। कंपनियों द्वारा माल की खरीदारी व परिवहन के फर्जी बिल तथा फर्जी धर्म कांटा पर्ची तैयार करते हैं। वास्तव में माल की खरीदारी व परिवहन नहीं होता है।
उनकी ट्रांसपोर्ट पर्ची भी यहीं पर तैयार करते हैं। धर्म कांटा पर्ची और ट्रांसपोर्ट बिल्टी पर उन गाड़ियों का नंबर डालते हैं, जिनकी लिस्ट पहले से उनके पास होती है। जीएसटी चोरी के लिए टैक्स इनवाइस, ई-वे बिल, ट्रांसपोर्ट बिल्टी व धर्म कांटे की पर्ची के साथ एक फाइल तैयार करते थे।
तैयार बोगस फाइल व बिल का इस्तेमाल कर शादाब सरकार से 18 प्रतिशत जीएसटी के हिसाब से आइटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) ले लेता है। अब तक शादाब के साथ मिलकर 1,300 करोड़ से अधिक के फर्जी बिल तैयार किए हैं। दोनों आरोपितों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। एसएसपी ने खालापार थाना पुलिस को 25 हजार रुपये इनाम से पुरस्कृत करने का घोषणा की है।
जीएसटी के संयुक्त आयुक्त सिद्धेश कुमार दीक्षित का कहना है कि जीएसटी चोरी के मामले की जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया पकड़े गए आरोपितों के बयान के आधार पर देखा जाए तो लगभग 1,300 करोड़ के फर्जी बिल बनने के बाद इन पर 18 प्रतिशत के हिसाब से 234 करोड़ की जीएसटी क्लेम बनता है।