Friday, March 1

अगर सरकार एफआईआर के नाम पर पत्रकारों की पेंशन रोकती है तो नौकरशाहों व राजनेताओं की सुविधाएं और आर्थिक सहायता भी रोकी जाए

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पिछले दिनों हरियाणा सरकार द्वारा पत्रकारों को पेंशन व अन्य कुछ सुविधा देने की घोषणा बड़ी गर्मजोशी से की गई थी और देशभर के समाचार पत्र संगठनों द्वारा इसे लेकर खुशियां भी मनाई गई थी लेकिन हरियाणा के पूर्व सीएम वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुडडा का कथन सही है कि सरकार पत्रकारों के अधिकार व स्वतंत्रता छीनना चाहती है क्योंकि जिस पत्रकार के खिलाफ एफआईआर होगी उसे पेंशन नहीं मिलेगी। खबर के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पत्रकारों के लिए बनाई गई पेंशन नीति की शर्तों पर. सवालिया निशान खड़ा किया है। हुड्डा का कहना है कि सरकार ने पत्रकारों पर दबाव बनाने व उन्हें पेंशन से वंचित करने के लिए जानबूझकर एफआईआर वाली शर्त जोड़ी है। पेंशन नीति में कहा गया है कि अगर किसी पत्रकार पर एफआईआर हुई तो उसे पेंशन नहीं दी जाएगी।
हुड्डा ने कहा कि बीजेपी-जेजेपी सरकार द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता का हनन करने के लिए बार-बार पत्रकारों के विरुद्ध एफआईआर को हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। देश की न्यायिक व्यवस्था कहती है कि महज मामला दर्ज होने से किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। इसलिए पेंशन नीति का ये प्रावधान पूरी तरह गैर-कानूनी है। वैसे भी पेंशन एक सम्मान निधि है, जिस पर इस तरह की शर्त नहीं लगाई जा सकती। केवल इसमे जघन्य अपराधी को पेंशन का लाभ न मिले, केवल पालिसी में ये शामिल हो सकता है । सभी योग्य पत्रकारों पर इस तरह का दबाव न बनाया जाए। अगर मौजूदा सरकार ऐसा नहीं करती है तो कांग्रेस सरकार बनने पर एफआईआर वाले प्रावधान को खत्म किया जाएगा, ताकि पत्रकारों के अधिकार व स्वतंत्रता सुरक्षित रखा जा सके।
मुख्यमंत्री जी मैं ही नहीं आप भी जानते हैं कि पत्रकारिता एक ऐसा काम है जिसमें सबको खुश नहीं किया जा सकता और आरोप प्रत्यारोप से बचा नहीं जा सकता क्योंकि किसी के बारे में आप कोई गलत बात लिखेंगे तो वह आपका दुशमन बनना ही है। फिर मारपीट के साथ एफआईआर लिखाना मामूली बात है। इसी प्रकार अगर आप अच्छा लिखेंगे तो सुनने को मिलेगा कि पैसे और सुविधा लेकर चमचागिरी कर रहा है। किसी के काले कारनामे उजागर किए जाएंगे तो वह कहता है कि ब्लैकमेल कर रहा है तो पत्रकारिता तो सांप छछुंदर वाला खेल हो गई है। यह बात विश्वास से कह सकता हूं कि मीडिया से जुड़े जो लोग है उनके द्वारा इस पेशे के सम्मान और गरिमा दोनो की लाज रखी जाती है लेकिन अगर मिशनरी और ईमानदारी से पत्रकारिता की जाएगी तो कोई तो नाराज होगा ही। अगर आप पेंशन के नाम पर लालच देना चाहते हैं तो उसे वापस ले ले या स्पष्ट करें कि एफआईआर होने पर पत्रकार का दृष्टिकोण गलत नहीं है तो उसे पेंशन मिलेगी।
मुख्यमंत्री जी पत्रकार ऐसा प्राणी है जिसे कहीं से कुछ प्राप्त नहीं होता है। सरकारी नौकरशाहों को आप सुविधाएं और मोटा वेतन देते हैं। सरकारी पदों पर रहने वाले नेताओं को वह सब मिल रहा है जो साधन संपन्न व्यक्ति को चाहिए। अगर एफआईआर के नाम पर पेंशन खत्म करनी है तो विवादित नौकरशाहों और आरोपित नेताओं की भी पेंशन समाप्त की जाए। इस नाम पर पत्रकारों का ही उत्पीड़न क्यों। दोनों हाथों में लडडू लेकर कोई नहीं चल सकता। इसलिए इस विषय पर जल्द हरियाणा सरकार स्थिति स्पष्ट करें।

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