मेरठ, 14 मार्च (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। पूरे जनपद में रिहायशी प्लाटों, कोठियों और मकानों का भू उपयोग बदलवाये बिना बनाये जा रही दुकानें और कॉप्लेक्स के बारे में सरकार और न्यायालयों द्वारा बरती जा रही सख्ती के बावजूद कुछ मोटा किराया कमाने में लगे लोगों द्वारा सभी सरकारी नियमों और निर्माणनीति के विपरीत जाकर घरों को दुकानों का रूप देने और छोटे-छोटे कमरों को बड़े-बड़े हॉलों में गाटर डालकर होल कमरों में परिवर्तित कर और फिर लाखों रूपये महिना के किराये का धंधा आजकल करने में लगे हैं कुछ व्यापारी।
इस संदर्भ में आबूलेन पर मेट्रो शूज के बराबर में पुराने घरको तोड़कर अंदर ही अंदर दीवार खड़ी कर लेंटर डालकर तीन मंजिला बना दिया गया चर्चा है कि बिना सुधार की अनुमति लिये यहा तोड़फोड़ के लिए और कोई भी एनओसी प्राप्त नहीं की है फर्नीचर बनवाने और सौंदर्यकरण के नाम पर रिहायशी भूमि पर हो रहा है निर्माण इस अवैध कॉमर्शियल निर्माण को लेकर काफी चर्चाएं चल रही हैं। कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि रजिस्ट्री में भी स्टाम्प की चोरी हुई बताई जाती है।
इस निर्माण में कोई वाहन पार्किंग नहीं है और यह जाम का कारण बनेगी।
जानकारों का कहना है कि हर तरह से यह निर्माण अवैध और गलत है। कैंट बोर्ड के सीईओ जाकिर हुसैन साहब और इंजीनियर पीयूष गौतम व अवधेश यादव आदि दें इस ओर ध्यान क्योंकि सुधार के नाम पर रिहायशी भूमि पर होने वाले कॉमर्शियल अवैध निर्माणों से यातायात व्यवस्था तो बिगड़ेगी ही और अन्यों को इससे गलत काम करने का प्रोत्साहन मिलेगा।
मेट्रो शूज के बराबर में एक कोठी के हिस्से को तोड़कर किये जा रहे इस अवैध शोरूम के निर्माण में बाटा कंपनी का शोरूम खुलने की संभावना है।
जागरूक नागरिकों में इसको लेकर भी खूब बातें हो रही है कि एक तरफ तो शास्त्री नगर सेन्ट्रल मार्किट में रिहायशी भूमि पर बने निर्माण तुड़वाने की कार्यवाही चल रही है दूसरी तरफ आबूलेन पर घरों की भूमि पर बन रही हैं दुकानें आखिर कैसे? -घुमंतु संवाददाता
