मेरठ 30 मार्च (प्र)। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के बाद अब मेरठ-प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन की तैयारी तेज हो गई है। रविवार को यूपीडा के सीईओ और अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने मेरठ से उन्नाव तक के गंगा एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया। इस दौरान 594 किमी लंबे एक्सप्रेसवे में से 421 किमी के हिस्से पर ‘फर्राटेदार’ ट्रायल और गुणवत्ता की जांच की गई। सीईओ ने उम्मीद जताई कि अगले महीने इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हो सकता है।
निरीक्षण की शुरुआत मेरठ के बिजौली से हुई। सीईओ ने खरखौदा के खड़खड़ी स्थित मुख्य टोल प्लाजा और वहां नवनिर्मित कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। टोल प्लाजा पर सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। सड़क की फिनिशिंग और सुरक्षा मानकों की जांच की गई। वहीं यूपीडा के सीईओ ने एक्सप्रेसवे के किनारे पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण किया।
निरीक्षण के दौरान यूपीडा सीईओ के साथ मेरठ डीएम डॉ. वीके सिंह, हापुड़ डीएम अभिषेक पांडेय, एसडीएम सदर दीक्षा जोशी, यूपीडा के मुख्य अभियंता आरके चौधरी, नोडल अधिकारी मोहित पाठक, प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश मोघा सहित राजस्व और पुलिस विभाग की पूरी टीम तैनात रही। मेरठ में निरीक्षण पूरा करने के बाद सीईओ हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव होते हुए लखनऊ की ओर रवाना हो गए।
गंगा एक्सप्रेसवे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए स्विस बेस्ड अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया है। गंगा एक्सप्रेसवे की राइडिंग क्वालिटी और कम्फर्ट को सुनिश्चित करने के लिए स्विस तकनीक का उपयोग किया गया है।
इसके लिए स्विट्जरलैंड की कंपनी आरटीडीटी के साफ्टवेयर खरीद कर एक इनोवा गाड़ी में लगाए गए। उन्हें एआई से जोड़ा गया है। स्विट्जरलैंड की कंपनी के साफ्टवेयर लगी इनोवा गाड़ी ने 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से मेरठ के बिजौली से लेकर बदायूं तक गंगा एक्सप्रेस वे की गुणवत्ता की जांच की। इसकी रिपोर्ट में गंगा एक्सप्रेसवे का परिणाम एक्सीलेंट आया है।
यूपीडा के नोडल अधिकारी मोहित पाठक ने बताया कि इसके तहत इनोवा गाड़ी वायब्रेशन टेक्नोलाजी और सेवन एक्सेलेरोमीटर सेंसर (फार क्वालिटी और तीन कम्फर्ट से लैस सभी छह लेन की जांच की गई है। यह वाहन रोड की सतह, कम्फर्ट लेवल और उतार-चढ़ाव का डाटा एकत्र करता है।
इस डाटा को एआइ साफ्टवेयर के माध्यम से चेक किया जाता है। इसमें चार परिणाम आते हैं। जिसमें एक्सीलेंट, गुड, एक्सपटल और पुअर आता है। इस तकनीक से यह तुरंत पता चल जाता है कि सड़क का कौन सा हिस्सा मानकों पर खरा नहीं उतर रहा।
निर्माण के दौरान ही इन कमियों को सुधारने से लेकर बाद में मेंटेनेंस की लागत और चुनौतियां कम होंगी। गंगा एक्सप्रेसवे पर स्विस तकनीक के जरिए निर्माण के दौरान ही रोड की क्वालिटी और कम्फर्ट की निगरानी हो रही है।
मेरठ के बिजौली से बदायूं तक की दूरी करीब 129 किलोमीटर है। वाहन में लगे साफ्टवेयर से एक्सप्रेसवे के मनकों की जांच की गई है।
