मेरठ 02 जनवरी (प्र)। पाश कालोनी साकेत की द मेरठ सहकारी आवास समिति के वर्ष 2013-18 के लिए निर्वाचित प्रबंध समिति के पदाधिकारियों और आठ सदस्यों पर समिति को 1.78 करोड़ रुपये की क्षति पहुंचाने का आरोप जांच में साबित हुआ है। जांच के बाद अपर आयुक्त आवास और अपर निबंधक ने इस राशि की वसूली पूर्व अध्यक्ष, सचिव और आठ सदस्यों से कराने तथा इन सभी के पांच साल तक किसी भी सहकारी समिति के किसी भी पद के निर्वाचन में शामिल होने अथवा बने रहने पर प्रतिबंध लगाया है। समिति को यह क्षति कालोनी में मकान की बिक्री में लाभांश की वसूली न करके पहुंचाई गई है।
अपर निबंधक और अपर आयुक्त आवास विनय कुमार मिश्र द्वारा 28 नवंबर को जारी आदेश में कहा है कि वर्ष 2013 से 2018 तक के लिए निर्वाचित कालोनी की प्रबंध समिति के कार्यों की निरीक्षण आख्या 28 जून 2023 को प्राप्त हुई थी। सहायक आवास आयुक्त अभिषेक वर्मा के नेतृत्व में जांच समिति गठित कर सुनवाई कराई गई। इस जांच रिपोर्ट में बताया गया कि कालोनी में मकान की बिक्री में सदस्य को होने वाले लाभ में से 10 प्रतिशत लाभांश समिति को देना होता है। वर्ष 2014-15 से वर्ष 2016-17 तक तीन वर्ष में 20 मकानों की बिक्री हुई। इनसे 1,78,34,903 रुपये का लाभांश समिति को मिलना चाहिए था लेकिन यह तत्कालीन प्रबंध समिति ने नहीं वसूला। सुनवाई के दौरान तत्कालीन अध्यक्ष ने इस राशि की वसूली की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी थी।
अपर आवास आयुक्त ने अपने आदेश में इस राशि को समिति की क्षति मानते हुए इसके लिए तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और प्रबंध समिति के आठ सदस्यों को सैद्धांतिक रूप से दोषी माना है। उन्होंने इस राशि में से तत्कालीन अध्यक्ष और सचिव से 25-25 प्रतिशत और आठ सदस्यों से बाकी 50 प्रतिशत राशि में से समान राशि की वसूली का आदेश दिया है। उन्होंने इन सभी को अगले पांच वर्ष के लिए किसी भी सहकारी समिति में किसी पद के निर्वाचन में शामिल होने अथवा पद पर बने रहना भी प्रतिबंधित किया है।
क्षति नहीं पहुंचाई, सदस्यों से जमा कराया जा रहा है पैसा
प्रबंध समिति के तत्कालीन अध्यक्ष अभिनव यादव और सदस्य शशांक शर्मा ने बताया कि उसी समय कालोनी की 260 सदस्यों की आम सभा में यह फैसला लिया गया था कि मकान बिक्री में लाभांश की राशि को 10 प्रतिशत से कम करके पांच प्रतिशत किया जाए। इस निर्णय के प्रस्ताव को अनुमति के लिए अपर निबंधक कार्यालय में भेजा गया। इसके बाद कई पत्र भी भेजे लेकिन न स्वीकृति मिली न ही पत्र का जवाब । आखिरकार इसे स्वीकृति की सहमति मानते हुए लागू कर दिया गया लेकिन अहतियातन पांच प्रतिशत राशि को समिति के खाते में आरटीजीएस कराया गया और बाकी पांच प्रतिशत राशि के पोस्टडेटेड चेक जमा कराए गए। विरोध शुरू हुआ तो इस राशि की वसूली शुरू की गई। अब तक तीन लोगों से पूरा पैसा जमा कराया जा चुका है। बाकी के विरुद्ध आर्बिट्रेशन के केस दर्ज हैं। बकाया राशि भी 1.78 करोड़ से काफी कम है। इस आदेश के विरुद्ध अपील भी की है।
प्रबंध समिति के पूर्व पदाधिकारियों के नाम और आरोपित राशि
- अभिनव यादव तत्कालीन अध्यक्ष 44,58,725
- रण सिंह तोमर तत्कालीन सचिव 44,58,725
- सुधीर कुमार सदस्य 11,14,681
- सविता गुप्ता सदस्य 11, 14, 681
- अजय कुमार सिंह सदस्य 11,14,681
- शशांक शर्मा सदस्य 11,14,681
- क्षमा त्यागी सदस्य 11,14,681
- प्रेमवीर सिंह सदस्य 11,14,681
- नरेश चंद्र अग्रवाल सदस्य 11,14,681
- जवाहर लाल लूथरा सदस्य 11,14,681
(नोट: धनराशि रुपये में है।)
