मेरठ 07 अप्रैल (प्र)। गर्मियों की ढलती शाम के साथ ही मच्छरों का हमला तेज हो जाता है। बचाव के लिए घर-घर में 10 रुपये की मच्छर अगरबत्ती सबसे आसान उपाय के रूप में जला दी जाती है, जो 10 मिनट में मच्छर खत्म करने का दावा करती है। रोजमर्रा में बच्चों को बाहर भेजने से पहले क्रीम लगाई जाती है तो वहीं कमरों में पूरी रात कॉइल और अगरबत्ती जलती रहती है। मच्छरों से बचने के लिए घर-घर में जलाई जाने वाली मच्छर अगरबत्ती अब एक खामोश खतरे के रूप में सामने आ रही है। जिस धुएं को लोग राहत और सुरक्षा मानते हैं, वही धीरे-धीरे शरीर में जाकर स्लो पॉइजन की तरह असर कर रहा है।
दरअसल, इस अगरबत्ती से निकलने वाला धुआं सामान्य नहीं होता। इसमें मौजूद पीएम 2.5 जैसे बेहद सूक्ष्म कण, कार्बन मोनोऑक्साइड, फॉर्मल्डिहाइड, बेंजीन और अन्य कैंसर पैदा करने वाले तत्व (कसिंजोनिक) मौजूद होते हैं। ये बारीक कण सांस के जरिए सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर वहां जमा हो जाते हैं और धीरे-धीरे फेफड़ों की कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे सांस की नलियों में सूजन, खांसी, सांस फूलना, एलर्जी, आंखों में जलन, सिरदर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लंबे समय तक लगातार इसके संपर्क में रहने से अस्थमा, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुगों पर इसका असर और अधिक तेजी से पड़ता है। यही वजह है कि यह धुआं तुरंत नहीं बल्कि धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है और इसे धीमा जहर कहा जाता है।
मच्छरों से सुरक्षा का आसान घरेलू उपाय
अगरबती का सीमित उपयोग करें, लगातार न जलाएं।
कमरे में खिड़की-दरवाजे खुले रखें।
बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा मरीजों को धुएं से दूर रखें।
बंद कमरे में अगरबती न जलाएं।
धुएं की जगह प्राकृतिक विकल्प अपनाएं जैसे फूल, हर्बल चीजें
नीम व नारियल तेल त्वचा पर लगाएं। कपूर जलाएं।
नीबू में लौंग लगाकर कमरे में रखें। तुलसी का पौधा घर में रखें।
बढ़ रहीं सांस और आंखों की समस्याएं
चिकित्सकों का मानना है कि इन दिनों घरों में लगातार जलाई जा रही अगरबतियों का धुआं लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है सबसे ज्यादा प्रभाव श्वसन तंत्र पर देखा जा रहा है जिसके चलते कई लोगों में छाती में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत बढ़ रही है। अगरबत्ती के धुएं से लोगों में खांसी, गले में खराश, सांस फूलना, सीने में भारीपन और अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं। जिन लोगों को पहले से एलर्जी या दमा की समस्या है उनके लिए यह धुआ और भी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकता है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं आंखों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।
