मेरठ, 12 फरवरी (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। होली से एक रविवार छोड़कर लगने वाले उत्तरी भारत के प्रसिद्ध गंगा जमुनी तहजीब और भाईचारे का प्रतीक मेला नौचंदी की तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर शुरू हो गयी हैं। हर वर्ष लगने वाले इस पारंपरिक मनोरंजक और परंपराओं को बढ़ावा देने वाला मेला एक वर्ष जिला पंचायत और एक वर्ष नगर निगम द्वारा लगाया जाता रहा है। पिछले वर्षों में इसे प्रांतीय मेला यूपी सरकार ने घोषित किया तब से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में यह मेला लगता है जिससे वह चाहे उससे लगवा सकते हैं इस बार मेला नौचंदी का काफी ज्ञान रखने वाले और शहर व जिले की परंपरागत व्यवस्थाओं के जानकार जिलाधिकारी डा. वीके सिंह द्वारा यह जिम्मेदारी जिला पंचायत को सौंपी गयी है। बीते दिनों 11 फरवरी को डीएम की अध्यक्षता में एक बैठक हुई और फिर नौचंदी मेले का भ्रमण किया गया और तय हुआ कि मेला सादगी के साथ इसकी परंपराओं और धार्मिक एवं ऐतिहासिकता को ध्यान में रखा जाए। बैठक में सीडीओ नूपुर गोयल, एडीएम सिटी ब्रजेश सिंह आदि अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुई जिसमें मुख्य जिला मुख्यकोष अधिकारी वरूण खरे, जिला सूचना अधिकारी सुमित कुमार आदि मौजूद रहे।
कुछ ही दिनों बाद इसके लिये कमेटियां गठित हो जाएंगी और सौन्दर्यकरण, मेला क्षेत्र की साफ-सफाई, विद्युत व्यवस्था, सडक मरम्मत अन्य आदि के लिए टेंडर के साथ ही आने वाले दर्शकों की सुविधा हेतु शौचालय और पटेल मंडप की रंगाई पुताई शुरू हो जाएगी और ऐसा हमेशा होता रहा है। पिछले कई दशक से मेला का उद्घाटन तो होली से एक रविवार छोड़ दूसरे रविवार को होता रहा है और लगभग 15 दिन बाद लगता रहा है और नौवीं दशमी से पूर्व मेला अपने पूरे शबाब पर होता था क्योंकि दोनों धर्मों के लोगों द्वारा आयोजन शुरू हो जाते थे तो चंडीदेवी मंदिर पर पूजा-पाठ होने लगता था। लेकिन कॉरोना के बाद यह व्यवस्था बिगड़ी और तब से अब तक रूटिन में नही आ पा रही है प्रांतीय मेला घोषित होने पर लगा था कि अब सुधार होगा मगर पिछले साल के मेले को देखकर ऐसा नहीं हुआ।
मेले की परंपरा धार्मिकता और गौरव सम्मान की पुनरू बहाली हेतु समय से इस मेले का आयोजन शुरू हो और नौवीं दशमी पर वही रवन्नक दिखाई दे ऐसा प्रयास जिलाधिकारी जी को जनप्रतिनिधियों के सहयोग से करना चाहिए।
मुझे लगता है कि इस काम में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राज्य सभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी पूर्व सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, कैंन्ट विधायक अमित अग्रवाल और शहर विधायक रफीक अंसारी को जिलाधिकारी श्री वीके सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी से विचार-विमर्श कर मेले की ऐतिहासिकता बहाल कराने के प्रयास किये जाये तो अच्छा है।
