Sunday, April 14

खोया हुआ रूतबा सूद समेत हासिल करेंगेः महबूबा मुफ्ती

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श्रीनगर 18 दिसंबर। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी तो देशभर से प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया. इसी कड़ी में एक बार फिर से पीडीपी सुप्रीमो महबूबा मुफ्ती ने अपनी भड़ास सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निकाली है. इस बार तो उन्होंने कहा दिया कि सुप्रीम कोर्ट कोई खुदा नहीं है. एक प्रकार से महबूबा मुफ्ती ने भड़काऊ बयान दिए और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दे डाली है. न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि हमको हिम्मत नहीं हारनी है. जम्मू कश्मीर के लोगों ने कई सालों तक मेहनत की है और हिम्मत दिखाई है. हमको कुर्बानियों को व्यर्थ नहीं जाने देना है. उन्होंने कहा कि हमारे विरोधी चाहते हैं कि हम हिम्मत हारें और फैसले को कबूल करके घर में बैठ जाएं. ऐसा नहीं होगा. हम आखिरी हद तक जद्दोजहद करेंगे. इसके बाद जो हमारा खोया हुआ वकार है, उसको सूद समेत हासिल करेंगे. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की भी आलोचना कर दी.

उन्होंने कहा कि ये सुप्रीम कोर्ट कोई खुदा नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के बहुत सारे ऐसे फैसले हैं जो दूसरी तरह हैं. इसी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 370 को नहीं हटाया जा सकता है, संवैधानिक असेंबली के बगैर लेकिन अब इसी सुप्रीम कोर्ट के द्वारा ऐसा कहा जा रहा है. आज किसी जज ने कोई और फैसला सुना दिया तो इसको हम खुदाई हुकुम नहीं मान सकते हैं. हम तो जद्दोजहद जारी रखेंगे. ये वही महबूबा मुफ्ती हैं जिन्होंने फैसले के तत्काल बाद ही इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मौत की सजा से कहीं से कम नहीं है. उन्होंने कहा कि यह भारत की अवधारणा को विफल करता है, जिसके साथ मुस्लिम बहुसंख्यक राज्य को 1947 में शामिल किया गया था.

उस समय फैसले के बाद मुफ्ती ने एक वीडियो संदेश शेयर किया था और कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारत की अवधारणा को विफल करने वाला है. कहा था कि संसद में लिए गए एक असंवैधानिक और अवैध निर्णय को कानूनी घोषित किया गया है. यह न केवल जम्मू कश्मीर के लिए मौत की सजा है, बल्कि भारत की अवधारणा को भी विफल करता है. यह भारत की परिकल्पना, गांधी के भारत की विफलता है, जिसके साथ जम्मू कश्मीर के मुसलमानों ने पाकिस्तान को खारिज कर हिंदू, बौद्ध, सिख और ईसाई धर्मावलम्बियों वाले गांधी के देश के साथ हाथ मिलाया था. आज भारत की अवधारणा विफल हो गई है.

बताते चले कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाना वैध माना. इसके बाद इस पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हुआ. इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक बताया था. उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 को भारत की संसद के लिए फैसले को संवैधानिक तौर पर स्वीकृति मिली है, यह काफी खुशी का विषय है.

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