Friday, August 29

130वें संविधान संशोधन का विरोध क्यों, ऐेसे मामलों में जब आम नागरिक पीड़ित होता है तो क्यों खामोश बने रहता है विपक्ष

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भले ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा 130 वां संविधान संसोधन विधेयक सहित पेश किए गए तीन बिल खासकर 30 दिन तक जेल में रहे तो पीएम सीएम और मंत्रियों को पद छोड़ना होगा को लेकर जो विरोध जताया जा रहा है यह 130 वां संविधान संसोधन विपक्ष की निगाह में क्या अहमियत रखता है यह तो वो ही जाने लेकिन जिस तरह इसका विरोध किया जा रहा है वो समझ से बाहर है क्योंकि सत्ता एक व्यक्ति के हाथ में नहीं रहती है। यह आनी जानी है। इसलिए आज कोई और है तो कल किसी और को इसे संभालना है तो सत्ता में तो सभी आएंगे। जहां तक पीएम तो एक है लेकिन सीएम बहुत हैं और कई विपक्षी दलों की सरकारें प्रदेशों में है इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि यह विपक्ष के सीएम व मंत्री पर ही लागू होगा। विपक्ष पूछ रहा है कि इसे लागू करने को लेकर इतनी हडबडी क्यों तो मुझे लगता है कि विपक्षी सोच वाले इस बिल का विरोध क्यों कर रहे हैं। अमित शाह ने यह कहते हुए कि हमें क्या नैतिकता सिखाएंगे ये मैंने गुजरात का गृहमंत्री रहते हुए अपनी गिरफतारी से पहले इस्तीफा दे दिया था। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का कहना है कि यह विधेयक सुपर आपातकाल से भी बड़ा कदम है। इससे भारत में लोकतांत्रिक युग को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाएगा। आईएमआईएमआई के औवेशी ने विधेयक को असंवेधानिक बताया। क्या औवेशी यह बता सकते हैं कि कितनी सरकारें जनता को जवाबदेह होने का पालन कर रही है। मेरा मानना है कि इस बिल का विरोध ना कर विपक्ष को इस बात के लिए सरकार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए कि पुलिस या अन्य जांच एजेंसी इसका दुरूपयोग नहीं करेंगी और इसका पालन विपक्षी दलों की सरकारों के खिलाफ किया जाएगा वो ही नीति सत्ताधारी दल के खिलाफ अपनाई जाएगी। कांग्रेेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि अगर पीएम सीएम या मंत्री गंभीर अपराध में गिरफतार होते हैं तो उन्हें पद पर रहने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। यह तो उच्च स्तरीय सोच बताई जा रही है। मैं इसका विरोध करने वालों से एक सवाल करना चाहता हूं कि जब एक आम आदमी के खिलाफ ऐसे आरोपों में कार्रवाई होती है मगर विपक्ष उसका इतना विरोध क्यों नहीं करता। क्या पद और ताकत कुछ लोगों को बचाने के लिए ही मिलती है। इस मामले में मैं सरकार समर्थक तो हूं नहीं लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के इस कथन से सहमत नहीं हूं कि भ्रष्टाारियों को बचाने के लिए विपक्ष संघर्ष करता नजर आ रहा हैं लेकिन इस बिल का विरोध करने वालों से यह पूछना जरूर चाहता हूं कि क्या वो जिस तरह लोकसभा में विरोध कर रहे हैं भविष्य में किसी नागरिक के साथ ऐसी ज्यादती होगी तो क्या वो उस समय भी नागरिक हित में ऐसा ही विरोध प्रदर्शन करेंगे। मुझे लगता है कि यह विधेयक क्यो आया यह अलग विषय हो सकता है मगर विपक्ष के प्रमुख नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मिलकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए चर्चा की जानी चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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