लखनऊ 18 अगस्त। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रॉमा सेंटर में न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम ने 3 साल के एक बच्चे के सिर और कंधे में फंसी लोहे की ग्रिल को सफलतापूर्वक निकाल दिया.
20 फीट की ऊंचाई से गिरा था बच्चा: गोमतीनगर के रहने वाले कार्तिक 20 फीट की ऊंचाई से गिर गया था. रेलिंग की लोहे की ग्रिल उसके शरीर में आर-पार हो गई थी. हादसे के बाद परिवार वाले कार्तिक को लेकर निजी अस्पताल पहुंचे. वहां ऑपरेशन का खर्च 15 लाख रुपये से अधिक बताया गया.
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह राशि बहुत ज्यादा थी. निराश होकर, वे रात करीब 11:45 बजे बच्चे को उसी लोहे की छड़ के साथ केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे. बच्चे की सर्जरी आसान नहीं थी. डॉक्टरों को टीम को निम्न चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
लोहे की ग्रिल बच्चे के सिर के बेहद करीब थी, जिसे काटना बहुत मुश्किल था. शुरुआती कोशिशें नाकाम रहीं. छड़ के कारण सीटी स्कैन नहीं हो पा रहा था, जिससे डॉक्टर अंदरूनी चोटों का अंदाजा नहीं लगा पा रहे थे. ग्रिल सिर के आर-पार होने की वजह से बच्चे को ऑपरेशन टेबल पर सही से लिटाना भी एक बड़ी चुनौती थी.
इन सभी चुनौतियों के बावजूद, केजीएमयू की न्यूरोसर्जरी टीम ने हिम्मत नहीं हारी. न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. बीके ओझा की देखरेख में डॉ. अंकुर बजाज ने इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व किया. डॉ. सौरभ रैना, डॉ. जेसन, और डॉ. बसु ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. कुशवाहा और डॉ. मयंक सचान की टीम के साथ-साथ ट्रॉमा सर्जरी की डॉ. अनीता ने भी इस ऑपरेशन में पूरा सहयोग दिया.
लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस सर्जरी के बाद, डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और लोहे की छड़ को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया. फिलहाल, कार्तिक बाल रोग विभाग के आईसीयू में वेंटिलेटर पर है. उसकी हालत में सुधार हो रहा है.
बच्चे के भावुक परिवार ने डॉक्टरों को ‘भगवान का रूप’ बताया और केजीएमयू को ‘मंदिर’ कहकर उसकी तारीफ की. कुलपति पद्मश्री सोनिया नित्यानंद ने भी पूरी टीम की सराहना की और इस ऑपरेशन को केजीएमयू की बेहतरीन चिकित्सा क्षमता का बड़ा उदाहरण बताया.