मेरठ 14 जनवरी (प्र)। दिल्ली रोड पर बनने जा रही मेरठ विकास प्राधिकरण की इंटीग्रेटेड टाउनशिप के लिए सहमति के आधार पर दी जा रही जमीन को किसानों ने देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि सहमति के आधार पर की जा रही जमीन बिक्री से मिल रहे मुआवजे पर कैपिटल गेन टैक्स लग रहा है जबकि भूमि अधिग्रहण के मामले में किसानों को इस पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता। कैपिटल गेन टैक्स से बचने के लिए किसानों को 2 साल के अंदर जमीन बिक्री से मिली धनराशि को जमीन में ही निवेश करना होगा। इसके चलते अब किसानों ने जमीन देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। दो साल की जद्दोजहद के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण सिर्फ 148 हेक्टेयर जमीन की ही खरीद कर सका है, जबकि टाउनशिप के लिए करीब 300 हेक्टेयर जमीन खरीदी जानी है। मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना ने जमीन मुआवजे पर लग रहे कैपिटल गेन टैक्स को खत्म करने के लिए प्रमुख सचिव आवास को पत्र भेजा है।
सीए अनुपम शर्मा का कहना है सहमति के आधार पर सरकारी परियोजना के लिए दी गई जमीन बिक्री से मिली धनराशि पर कैपिटल गेन टैक्स का प्रावधान है। अगर किसानों ने जमीन बिक्री से मिली धनराशि से 2 साल के अंदर कृषि भूमि नहीं खरीदी तो उन्हें अप्रैल 2001 के सर्किल रेट के ऊपर जितना भी जमीन बिक्री पर लाभ मिलेगा, उन्हें उस लाभ पर 12.50 फीसदी कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। इससे बचने के लिए किसानों को जमीन के लाभांश को कृषि में ही निवेश करना होगा। हालांकि भूमि अधिग्रहण के मामले में कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है।
ये हुई जमीन खरीद
गांव का नाम भूमि खरीद हेक्टेयर में मुआवजा धनराशि मोहिउद्दीनपुर 45.63 411.83 करोड़
छज्जूपुर 21.58 79.66 करोड़
कायस्थ गांवड़ी 81.16 583.18 करोड़
मेडा वीसी संजय कुमार मीना का कहना है कि किसानों को दिए जा रहे मुआवजे पर लग रहे कैपिटल गेन टैक्स को जमीन अधिग्रहण अधिनियम 2013 के मूल अधिनियम धारा 96 के आधार पर करमुक्त माने जाने के संबंध में प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को पत्र भेजा है। इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना के लिए चार राजस्व गांवों के किसानों की जमीन सहमति के आधार पर ली जा रही है, लेकिन जमीन बिक्री से प्राप्त मुआवजा धनराशि पर कैपिटल गेन टैक्स लग रहा है। अब किसान कैपिटल गेन टैक्स लगने पर जमीन देने से मना कर रहे हैं, जिसके चलते टाउनशिप परियोजना के लिए जमीन खरीद प्रक्रिया धीमी हो गई है।
