मेरठ 30 जनवरी (प्र)। भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा मंत्रालय के राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने गूगल के एआई फॉर लर्निंग फोरम में शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एकीकृत करने को लेकर सरकार का विजन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर कौशल विकास मंत्रालय, गूगल क्लाउड और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बीच एक ऐतिहासिक साझेदारी की घोषणा की गई। इस साझेदारी के तहत सीसीएसयू को भारत की पहली एआई- इनेबल्ड स्टेट यूनिवर्सिटी (पायलट प्रोजेक्ट) के रूप में चुना गया है। यह पहल प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जयंत चौधरी ने कहा कि लंबे समय से डिग्री और स्किल्स को अलग-अलग माना जाता रहा है, लेकिन एआई अब दोनों को जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी केवल टेक्नोलॉजी अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा एम्प्लॉयबिलिटी इंजन तैयार करेगी, जिससे देश के किसी भी कोने में बैठे युवाओं को विश्वस्तरीय कौशल प्राप्त हो सकेगा। गूगल इंडिया की वीपी और कंट्री मैनेजर प्रीति लोबाना ने कहा कि गूगल भारत को ग्लोबल एआई हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस सहयोग के माध्यम से सीसीएसयू में पर्सनलाइज्ड एआई ट्यूटर, एआई- आधारित करियर सपोर्ट और स्किल-गैप एनालिसिस जैसे इनोवेटिव लर्निंग सॉल्यूशंस विकसित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में गूगल के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
फॉर्मल सत्र से पहले मंत्री जयंत चौधरी ने सीसीएसयू के छात्रों और शिक्षकों से संवाद किया और इस बात पर चर्चा हुई कि एआई कैसे शिक्षा को बेहतर बना सकता है और टियर-2 व टियर 3 शहरों के युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर पैदा कर सकता है। सीसीएसयू को नेशनल एआई लिविंग लेबोरेटरी के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां एआई आधारित शैक्षणिक सुधारों का पायलट परीक्षण होगा। मंत्री ने बताया कि इस परियोजना से जुड़े अनुभवों को भविष्य में देश की 45,000 से अधिक कॉलेजों और 1,200 से अधिक विश्वविद्यालयों में लागू किया जाएगा।
जयंत चौधरी ने कहा कि यह साझेदारी भारतीय उच्च शिक्षा के भविष्य के लिए एक गोल्ड स्टैंडर्ड साबित होगी और मेरठ के छात्रों को भी वही एआई सुविधाएं मिलेंगी, जो वैश्विक टेक्नोलॉजी हब्स में उपलब्ध हैं।
