Saturday, January 31

शास्त्रीनगर की रिहायशी कॉलोनियों के 618 अवैध निर्माणों पर चलेगा बुलडोजर

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मेरठ 31 जनवरी (प्र)। शास्त्रीनगर की रिहायशी कॉलोनियों में लंबे समय से चल रहे अवैध निर्माणों पर अब कार्रवाई तय मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई सर्वे रिपोर्ट के बाद यह साफ हो गया है कि 618 ऐसे निर्माण हैं, जिन पर बुलडोजर चल सकता है। जिन प्लॉट्स पर मकान बनने थे, वहां नियमों को दरकिनार कर दुकानें और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। कोर्ट के रुख के बाद यूपी आवास एवं विकास परिषद ने इन अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्ती की तैयारी शुरू कर दी है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन एसएलपी (सी) संख्या 36440/2014 से जुड़ा है कोर्ट ने 19 नवंबर 2024 को यूपी आवास एवं विकास परिषद को निर्देश दिए थे कि यह बताया जाए कि आवंटित प्लॉट्स का उपयोग तय उद्देश्य के अनुसार हो रहा है या नहीं। इसके बाद कराए गए सर्वे में अवैध निर्माण की चौकाने वाली तस्वीर सामने आई।

शास्त्रीनगर योजना में वर्षों से रिहायशी प्लॉट्स पर दुकानें, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से खुली पूरी फाइल शास्त्रीनगर योजना संख्या-3 ही नहीं, बल्कि योजना संख्या-7 में भी 1087 हालात गंभीर हैं। योजना संख्या-7 में 6379 रिहायशी प्लॉट्स में से 860 प्लॉट्स पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित पाई गईं। यानी कॉलोनी धीरे-धीरे अवैध बाजार में तब्दील हो गई। यूपी आवास एवं विकास परिषद ने कई मामलों में पहले भी नोटिस जारी किए। वर्ष 2005 और 2011 में अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश भी दिए गए, लेकिन स्थानीय स्तर पर सहयोग न मिलने से कार्रवाई टलती रही। यही वजह रही कि अवैध दुकानें और शोरूम सालों तक चलते रहे। सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट तथ्य सामने आने के बाद अब परिषद ने सख्त रुख अपना लिया है अधिकारियों के अनुसार, कोर्ट के निदेशों के अनुपालन में अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए प्रशासन और पुलिस से सहयोग लेकर चरणबद्ध तरीके से बुलडोजर चलाने की तैयारी है।

असमंजस में व्यापारी
रिपोर्ट सामने आते ही शास्त्रीनगर के दुकानदारों और भवन स्वामियों में हड़कंप मच गया है। वर्षों से चल रहे अवैध कारोबार पर अब कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है साफ संकेत है कि अब रिहायशी प्लॉट पर दुकान नहीं चलेगी।

जजमेंट की कॉपी मिलने के बाद होगी कार्रवाई
आवास एवं विकास परिषद के डिप्टी हाउसिंग कमिश्नर अनिल सिंह ने बताया कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जजमेंट कॉपी परिषद को प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जैसे ही जजमेंट की प्रति उपलब्ध होगी, उसके सभी तथ्यों का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। परिषद पूरी तरह से अदालत के निदेशों का पालन करेगी।

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