मेरठ 03 फरवरी (प्र)। भीकुंड स्थित गंगा के घाट पर गुरुवार को विश्व प्रकृति निधि एवं वन विभाग द्वारा 1633 कछुए छोड़े गए। इस दौरान डीएफओ व अन्य अतिथि मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने भी सहभागिता निभाई। सोमवार को ब्लाक प्रमुख नितिन पोसवाल, भाजपा जिलामंत्री सुनील पोसवाल, डीएफओ वंदना फोगाट मखदुमपुर गंगा घाट पर विश्व प्रकृति निधि एवं वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे कछुआ संरक्षण अभियान के तहत कछुओं के बच्चों के गंगा नदी में छोड़ा गया। जिसमें बटागुर ढोंगोको प्रजाति के एक, पंगसुरा स्तिमि 944, पंगसुरा टेनटोरियो प्रजाति के 648 कछुए गंगा में छोड़े गए हैं।
2013 से अब तक छोड़े जा चुके 14,033 कछुए
कछुआ संरक्षण अभियान वर्ष 2013 में प्रारंभ हुआ और अब तक लगभग 13 हजार कछुओं का संरक्षण कर गंगा नदी में छोड़ा गया है। सोमवार को छोड़े गए कछुओं की संख्या मिलाकर 14033 हो गई है।
विश्व प्रकृति निधि के वरिष्ठ समन्वयक डा. गोरा चंद्र दास ने बताया कि गंगा नदी किनारे हैचरी लगाकर कछुओं के अंडों को संरक्षित किया जाता है और समय अनुसार जब अंडों से बच्चे निकल जाते है तो उन्हें सामाजिक वानिकी प्रशिक्षण केंद्र में बने अत्याधुनिक तालाब में रखा जाता है। जब वे गंगा नदी में तैरने की स्थिति में हो जाते है तो उन्हें गंगा नदी में छोड़ दिया जाता है।
जिला गंगा समिति के समन्वयक तुषार गुप्ता ने बताया कि कछुए नदी के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण अंग हैं। गंगा में पाए जाने वाले कछुए केवल जीव नहीं, बल्कि इस पवित्र नदी के नेचुरल इंजीनियर और सफाई कर्मचारी हैं। इनकी विशेषताएं इन्हें नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अनिवार्य बनाती हैं। गंगा में कछुए सड़े-गले जैविक पदार्थों, मृत जीवों और कचरे को खाकर पानी को साफ रखते हैं।
