मेरठ 06 फरवरी (प्र)। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने इंडिया एनर्जी स्टैक फ्रेमवर्क के तहत इंटर स्टेट पीयर-टू-पीयर सौलर ऊर्जा ट्रेडिंग पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। यह पायलट प्रोजेक्ट उपभोक्ता केंद्रित, पारदर्शी और आधुनिक ऊर्जा बाजार के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें पीवीएनएल, टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड और बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड मिलकर पहला इंटर स्टेट पीयर टू पीयर ऊर्जा ट्रेडिंग पायलट संचालित कर रहे हैं।
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत पीवीएनएल के उपभोक्ता, जिनके परिसरों में सोलर पैनल और स्मार्ट मीटर स्थापित हैं। वे अपनी अतिरिक्त सौर ऊर्जा को डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से सीधे बाजार में बेच सकेंगे। इससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा। इससे ऊर्जा की खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी एवं कुशल बनेगी।
इंडिया एनर्जी स्टैक, भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहल है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण एवं उपभोक्ताओं के मध्य एक सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल ढांचा विकसित करना है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित उन्नत डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे उपभोक्ता अपनी ऊर्जा खपत, सौर उत्पादन एवं संभावित लेन-देन से संबंधित निर्णय अधिक सरलता एवं सटीकता के साथ ले सकेंगे। इससे स्मार्ट मीटरिंग के माध्यम से ग्रिड संचालन की दक्षता में सुधार होगा और हरित ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा। पीवीएनएल के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने बताया कि यह पहल उपभोक्ताओं को केवल विद्युत उपभोक्ता तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें सक्रिय ऊर्जा बाजार भागीदार के रूप में स्थापित करेगी।
यह परियोजना भविष्य में उपभोक्ता- केंद्रित एवं डिजिटल बिजली बाजार के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस पहल का औपचारिक प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर के मंच पर किया जाएगा, जिससे डिजिटल एवं हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भारत सरकार की प्रतिबद्धता और अधिक सशक्त रूप में सामने आएगी।
परियोजना से उपभोक्ताओं को यह लाभ मिलेगा
- सोलर ऊर्जा उत्पादक उपभोक्ताओं को अपनी अतिरिक्त बिजली से आय अर्जित करने का अवसर
- पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी दरों पर नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता
- डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से ऊर्जा लेन-देन में पारदर्शिता एवं विश्वास में वृद्धि
- स्मार्ट मीटरिंग से ग्रिड संचालन की दक्षता में सुधार
- कार्बन उत्सर्जन में कमी
