मेरठ/शामली 01 अप्रैल (प्र)। इससे मेरठ और सहारनपुर मंडल और बिजनौर के किसानों को मिलाकर करीब 2 हजार करोड़ रुपये की चपत लगी है। अगर ये 2 हजार करोड़ रुपये किसानों की जेब में आता तो न केवल वेस्ट यूपी की अर्थव्यवस्था को बल मिलता बल्कि अधिक चीनी उत्पादन से शुगर इंडस्ट्री को भी ज्यादा लाभ प्राप्त होता।
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम गन्ने के अनकूल न रहने से लाल मकडी(माइट) कीट एवं सफेद मक्खी (व्हाइट फ्लाई) ने गन्ने का रस चूसकर उसे कमजोर करने के साथ ही अन्य रोगों को भी आंमत्रित किया। शुगर मिलों के आंकड़े बता रहे है कि शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, बुलंदशहर, हापुड़ और बिजनौर आदि जनपदों में गन्ना उत्पादन में 10 से 20 फीसदी की कमी आयी है। इसका सीधे पर किसानों को करीब 2 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।
अधिक वर्षा ने भी किया नुकसान : पिछले साल सामान्य से ज्यादा बारिश एवं तापमान में उतार चढ़ाव ने भी गन्ने के उत्पादन को प्रभावित किया है। अगस्त एवं सितंबर माह में भी तेज बारिश के चलते पेड़ी गन्ने के कल्ले ज्यादा नहीं फूट सके। सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, हापुड़, बुलंदशहर और बिजनौर जनपद में उत्पादन कम हुआ।
वेस्ट यूपी के लिए हरा सोना माना जाने वाला गन्ना इस बार चांदी बनकर रह गया है। गन्ना प्रजाति (को-0238) के रेड रोट रोग की चपेट में आने से जहां गन्ने की निकासी में 15 से 20 फीसदी की कमी आई है वहीं रही सही कसर लाल मकड़ी और सफेद मक्खी ने गन्ने का रस चूसकर पूरी कर दी है।
सहारनपुर और शामली में ज्यादा नुकसान
गन्ना रोग और मौसम की मार का असर सबसे ज्यादा मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली जनपद में देखने को मिला है। मुजफ्फरनगर में करीब 800 करोड़, सहारनपुर में करीब 450 करोड़, शामली में करीब 200 करोड़ रुपये का नुकसान आंका जा रहा है। वहीं मेरठ मंडल में हापुड़ जनपद को सर्वाधिक 180 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बागपत में करीब 80 करोड़ और बुलंदशहर जनपद में करीब 56 करोड़ रुपये का नुकसान माना जा रहा है। इसके अलावा बिजनौर जनपद में भी करीब 200 करोड़ रुपये की चपत लगी है।
