गत दिवस विश्व में भारत रत्न संविधान के रचयिता डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती मनाई गई। पहले के मुकाबले अब हर समाज जाति और राजनीतिक दल डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती मनाते हैँ क्येांकि उन्होंने संविधान हर नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए सहयोगियों के साथ मिलकर तैयार किया। कुछ विद्वानों के लेखों में कहा गया कि डॉ भीमराव अम्बेडकर द्वारा रचित साहित्य भी पढ़ा जाए जिससे सही बातों का ज्ञान हो। बताते हैं कि डॉ भीमराव अम्बेडकर की शिक्षा में एक अम्बेडकर नामक व्यक्ति ने बड़ा सहयोग दिया जिससे प्रभावित होकर डॉ भीमराव ने अपना सरनेम अम्बेडकर अपने से जोड़ लिया। इसके बारे में इतिहास पढ़ना चाहिए और सरकार को भी उसे पाठयक्रम में शामिल कर युवाओं का मार्गदर्शन करना चाहिए। फिलहाल कुछ दिनों से समाचार पत्रों में पढ़ने को मिला कि फिल्मी कलाकारों व वीआईपी द्वारा अपने नाम व फोटो का उपयोग बिना अनुमति के ना किए जाने के आदेश अदालत के माध्यम से कराए गए। जहां तक मुझे पता है ऐसे महापुरुषों व प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री व अन्य बड़े लोगों के फोटो का उपयोग बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता। इसके लिए एक प्रोटोकॉल नियम भी बना है और पुलिस प्रशासन को उनका पालन कराने की छूट है। कितने ताज्जुब की बात है कि बीते दिनो मीडिया में देखने को मिला कि डॉ भीमराव अम्बेडकर और प्रधानमंत्री व अन्य वीआईपी के फोटो लगाकर कुछ लोगों ने अपनी बधाईयां प्रकाशित कराई और कई ने तो प्रशासनिक अधिकारियों के ऊपर अपनी फोटो लगाकर बधाई संदेश जारी किए और विज्ञापनों में अपराधी व अपराधियों व संबंध चेहरे नजर आए मगर इन पर रोक लगाने के लिए जिम्मेदार आखिर सामने आकर कार्रवाई क्यों नहीं करते। मेरा मानना है कि महापुरुषों के प्रति सम्मान की भावना को देखते हुए प्रोटोकॉल अधिकारी को बिना अनुमति के पीएम सीएम और महापुरुषों के चित्रों संग छपवाने वाले फोटो पर रोक लगानी चाहिए क्योंकि यह व्यवस्था फिलहाल संविधान का हिस्सा है। और जो फिल्मी कलाकार इसे रोकने के लिए अदालता का सहारा ले रहे हैं तो प्रशासन को भी संविधान का पालन कराने के लिए अपना गलत तरीके से फोटो छपवाने की इच्छा रखने वाले और दो नंबर के धंधे में लगे लोगों की मनोकामना पर रोक लगाई जाए क्योंकि इसका गलत संदेश समाज में जा रहा है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
महान पुरुषों पीएम व सीएम के फोटो बिना अनुमति के विज्ञापन में अपने साथ प्रकाशित कराने वालों पर पुलिस प्रशासन लगाए रोक
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