मेरठ 30 मार्च (प्र)। गंगानगर थानाक्षेत्र में धनपुर निवासी 36 वर्षीय नैन सिंह का सिर में गोली लगा शव मिला। परिवार में कुल 10 लोग हैं। वारदात के दौरान नैन सिंह के छोटे भाई की पत्नी प्रियंका और दो बच्चे मौजूद थे। प्रियंका का कहना है कि उसे देर रात दो बजे बक्सा गिरने जैसी आवाज आई थी। उसने कमरे से बाहर आकर देखा लेकिन कुछ नहीं दिखा तो वह फिर से सो गई।
मां विमला का कहना है कि मैंने अपने फौजी बेटे को खो दिया। विमला रोते हुए कहती हैं- मुझे इंसाफ चाहिए तभी सब्र आएगा। बेटे के आरोपियों को फांसी की सजा होनी चाहिए। तभी हमें इंसाफ मिलेगा।
गरीब सिंह का कहना है कि नैन सिंह की पत्नी कोमल विवाद के चलते दो साल से अलग मेरठ में रहती है। 12 वर्षीय बेटी यशिका और सात साल के बेटे आयुष को तीन दिन पहले ही पिता नैन सिंह फाजलपुर में नाना के यहां छोड़कर आए थे। छोटा भाई प्रदीप भी बीएसएफ में जैसलमेर में तैनात है। वह भी शुक्रवार सुबह को ड्यूटी के लिए चले गए।
छोटा भाई जोनी मोदीनगर में मजदूरी करने गया था। मां विमला मेरठ में रह रही शादीशुदा बेटी अंजू से मिलने चली गईं थीं। पिता गरीब सिंह एक किसान के यहां सरसों इकट्ठा करने चले गए। शुक्रवार की रात वारदात के समय केवल प्रदीप की पत्नी प्रियंका अपने बच्चों दक्षु और गोरा के साथ कमरे में सोई थी।
प्रियंका ने पुलिस को बताया कि बराबर वाले कमरे में जेठ नैन सिंह सोए थे। शनिवार दोपहर दो बजे तक कमरे में हलचल न होने पर उसने गली से बच्चों को बुलवाकर दिखवाया। 12 घंटे से ज्यादा तक नैन सिंह का शव कमरे में पड़ा रहा।
घटनास्थल की जांच कर रहे सीओ सदर देहात सुधीर सिंह ने बताया कि नैन सिंह के सिर में गोली .315 बोर की गोली लगी है। महेश व उसकी पत्नी से पूछताछ की जा रही है। घटना का जल्द खुलासा कर दिया जाएगा।
2012 में बीएसएफ में हुए भर्ती
पिता गरीब सिंह के मुताबिक नैन सिंह सन 2012 में बीएसएफ में सिपाही भर्ती हुए थे। 2013 में फाजलपुर निवासी कोमल से उनकी शादी कर दी। दोनों के दो बच्चे 12 वर्षीय यशिका नौवी कक्षा और 7 वर्षीय बेटा दूसरी कक्षा में पढ़ते हैं। विवाद के चलते कोमल मेरठ में अपने मायके से अलग रहने लगी। दोनों बच्चे पिता के पास थे।
पेपर खत्म होने पर बच्चों ने नानी के यहां जाने की जिद की। तीन दिन पहले नैन सिंह बच्चों को फाजलपुर नाना के यहां छोड़ आया। उनका छोटा भाई प्रदीप भी 2015 में बीएसएफ में भर्ती हुआ था। उनकी तैनाती जैसलमेर में है। अविवाहित छोटा बेटा जोनी मोदीनगर में रहकर मजदूरी करता है।
जैसलमेर में तैनात बीएसएफ जवान प्रदीप कुमार ने बताया कि ये किसी पड़ोसी या आसपास वाले का काम है। जिसे हर चीज की जानकारी होती है। जो कोई पुरानी रंजिश लेकर बैठा हो। हमारा एक छोटा-मोटा विवाद था। हम दोनों भाई उस समय ड्यूटी पर ही थे। तब हमारे खेत और रास्ते को लेकर पड़ोसियों से झगड़ा चल रहा था। हो सकता है उसी रंजिश में ये घटना कर दी हो।
होली वाले दिन भी पड़ोसियों से झगड़ा हुआ था। तब हमारे भाई को खुलेआम धमकी दी गई कि तेरी हत्या कर देंगे। ये 4 मार्च की बात है। तब हम लोगों ने पुलिस को शिकायत भी की थी, लेकिन पुलिस ने कुछ एक्शन नहीं लिया। ये पूरी तरह से पुलिस-प्रशासन की लापरवाही है। अगर उसी शिकायत के बाद पुलिस एक्शन लेती तो आज हमारा भाई जिंदा यहां खड़ा होता।
रोहित ने बताया कि पड़ोसी प्रेम सिंह, अभिषेक और शुभम पर हमें शक है। उन्होंने ही होली के दिन धमकी दी थी। वो खुलेआम बदमाशी करते हैं। देश में जवान ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम आदमी का क्या होगा?
