हस्तिनापुर 15 जनवरी (प्र)। बेसहारा मवेशियों को पनाह देने के लिए बनाई गई गोशालाओं की बदहाली मवेशियों पर भारी पड़ने लगी है। भूख और ठंड से आए दिन मवेशी मर रहे हैं। शासन के निर्देश के बावजूद गोवंशों को न तो ठंड़ से बचने को जूट के बोरों का इंतजाम और न ही सुरक्षा की कोई व्यवस्था है। सूखा पुआल व पानी आहार के रूप में इन मवेशियों को दिया जा रहा है। कड़ाके की ठंड गोवंश के मौत की वजह बनी हुई है। इसका मुख्य कारण नाम की गोशालाओं में अव्यवस्था व गैर-जिम्मेदारी पाई गई है। जिले के कई अस्थायी गोशालाओं में रह रहे गोवंश इस सर्दी में गोशाला के अंदर रहते हुए भी खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। खाने में भी उन्हें सिर्फ सूखा चारा दिया जाता है। कहने को गोवंश की रक्षा के लिए गो रक्षा समिति का गठन तो किया गया है, जो गोशालाओं जाकर वहां की व्यवस्था की चेकिंग करती है। गायों की मौत गठित समिति व उसके कार्यों पर भी सवाल खड़ा करती है।
गो आश्रय स्थल में ठंड या भूख से गोवंश बेहाल हैं। स्थिति ये है कि गोवंशों के कंकाल आश्रय स्थल के आसपास पड़े मिल रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि लापरवाही के चलते दम तोड़ा है। हद तो हो गई जब आश्रय परिसर से थोड़े फासले पर कुत्ते मृत गोवंश को अपना निवाला बनाते दिखाई दिये। ये अव्यवस्था और दुर्दशा है हस्तिनापुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव बस्तौरा स्थित जिला पंचायत द्वारा संचालित गोशाला की ब्लॉक क्षेत्र के गांव बस्तौरा में जिला पंचायत द्वारा संचालित गौशाला में बेसहारा पशुओं की हालत गंभीर बनी हुई है। कड़ाके की ठंड और चारे की कमी कारण कई पशु बीमार हैं और कुछकी मौतें भी हुई हैं।
ग्रामीणों ने गोशाला प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बुधवार को मौके पर जमकर हंगामा किया। वस्तौरा निवासी ग्रामीणों ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि गोशाला में पशुओं की हालत बेहद खराब है। सर्दी के कारण पशु बीमार पड़ रहे हैं और चारा भूसा व उचित उपचार न मिलने से दम तोड़ रहे हैं। गोशाला में लगभग 50 पशु दर्ज हैं, जिनमें कुछ दुधारू भी हैं। ये पशु खुले में रहने से बीमार हो रहे हैं। सरकार द्वारा पशुओं के लिए सभी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं, लेकिन धरातल पर कोई सुविधा नहीं मिल रही है। पशुओं को सरकार से पशु आहार, दाना, चोकर, भूसा और हरा चारा मिलता है, लेकिन उन्हें केवल भूसे के सहारे रहना पड़ रहा है।
गोशाला में तैनात कर्मचारी अपनी मर्जी से काम करते हैं। जिसके चलते गोशाला में लगातार गोवंश की मौत हो रही है। बुधवार को भूख के चलते चार गोवंश की मौत हो गई, लेकिन जिम्मेदार मौन है। गो आश्रय स्थल में लगातार हो रही गोवंश की मौत के बाद जिला पंचायत के अवर अभियंता रोहित कुमार ने मौके पर पहुंचे कर जांच-पड़ताल कर केयर टेकर से गोवंश के स्वास्थ्य, चारे व देखभाल की जानकारी ली। जिसके पर गो आश्रय स्थल लगातार हो रही गोवंश की मौत से नाराज ग्रामीणों ने हंगामा किया। अवर अभियंता ने गोवंश की मौत की जांच कराये जाने की बात की तो ग्रामीण शांत हुए।
केयर टेकर फिर भी ये बदहाली
उत्तर प्रदेश में गो हत्या को रोकने व गो संरक्षण के लिए बनाई गई गोशाला ही उनकी कब्रगाह बनती जा रही हैं। गोशाला में इन दिनों गो माता ठंड व भूख-प्यास से तड़प-तड़प कर मर रही हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। जबकि प्रदेश सरकार द्वारा गोशालाओं के लिए करोड़ों का बजट भी दिया गया है। इन सबके बावजूद गोशाला में किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं है। इस कड़कड़ाती ठंड में गौशाला गोवंशों की कब्रगाह बनती जा रही है। रोजाना इस गौशाला में कई गायों की मौत हो रही है, और जिम्मेदार अधिकारी मौन बने हुए हैं। गोशाला में केयर टेकर होने के बावजूद आलम ये है कि देखने वालों की आंखों में आंसू आ जाते हैं, मगर जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों और ग्राम प्रधान का दिल नहीं पसीजता।
