Tuesday, May 28

मानवाधिकार का हनन है गुजारा भत्ता दिलाने में देरीः हाईकोर्ट

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प्रयागराज 12 दिसंबर। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत गुजारा भत्ता दिलाने में देरी मानवाधिकार का हनन है। शौहर अपनी तलाक शुदा बीबी को गरिमामय जीवन जीने से वंचित नहीं कर सकता। न्यायिक प्रक्रिया के बहाने पति को पत्नी का शोषण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने कहा कानूनी प्रक्रिया न्याय देने में बाधक नहीं बन सकती। प्रक्रियात्मक उलझाव के कारण न्याय रथ का पहिया रुक नहीं सकता। कोर्ट ने पिछले 21 साल से गुजारा भत्ते के एक पैसे का भुगतान न हो पाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरूपयोग होना बताया है। कोर्ट ने कहा परिवार अदालत बलिया ने चार बार अंतरिम गुजारा देने का एकपक्षीय आदेश दिया, जिसे शौहर ने अर्जी देकर चार बार वापस कराया और आदेश का पालन न कर शौहर ने न्याय प्रशासन में न केवल अवरोध उत्पन्न किया वरन् न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया है। जिसे कड़ाई से निपटना चाहिए।

कोर्ट ने बाद में 5 जून 23 को दिये गए प्रधान न्यायाधीश परिवार अदालत के आदेश को रद कर दिया और 18 दिसम्बर 21 को जारी आदेश को बहाल करते हुए शौहर को एक माह में पूरी बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि याची को 5 हजार रूपये प्रतिमाह की दर से 20 दिसम्बर 2002 अर्जी दायर करने की तिथि से भुगतान किया जाएगा। साथ ही आगे भी लगातार 5 हजार रूपए माह की 10 तारीख को जमा करते रहने का शौहर को निर्देश दिया है और आदेश का पालन न करने पर परिवार अदालत को वसूली कार्रवाई करने की छूट दी है। तथा परिवार अदालत को पूरे बकाये का भुगतान सुनिश्चित कराने का आदेश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने सहाबी खातून की याचिका को मंजूर करते हुए दिया है। मालूम हो कि याची और जमाल ख़ान की 12 जून 86 को शादी हुई। तीन बच्चे पैदा हुए। शादी के 13 साल बाद मनमुटाव हो गया और शौहर ने तलाक देकर याची को घर से बाहर कर दिया। वह अपने पिता के घर रहने लगी। शौहर ने बच्चों को अपने पास ही रखा।

याची ने दो हजार रूपये गुजारे भत्ते के लिए धारा 125 मे अर्जी दी। चार बार एकपक्षीय अंतरिम आदेश हुआ। जिसे शौहर की अर्जी पर बार-बार आदेश वापस ले लिया गया। याची को कोई भुगतान नहीं किया गया। शौहर कोल फील्ड कंपनी वर्धमान में सर्वेयर है। 96 हजार 616 रूपये वेतन है। वह सहयोग से कतरा रहा है। परिवार अदालत ने 5 हजार प्रतिमाह की दर से 18 दिसम्बर 21 को 12 लाख रूपये बकाया के भुगतान का आदेश दिया। जिसका पालन नहीं किया गया तो वसूली वारंट जारी हुआ। परिवार अदालत ने 5 जून 23 को बतौर हर्जाना 80 हजार रूपये देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा 21 साल से बीबी को शौहर ने एक पैसे गुजारा भत्ता न देकर न्यायिक प्रक्रिया का दुरूपयोग किया है।

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