मेरठ 13 फरवरी (प्र)। यूपी के पूर्व पुलिस महानिदेशक तथा सीएनआरसी के प्रदेश प्रभारी सूर्य कुमार शुक्ल ने कहा कि हस्तिनापुर क्षेत्र के 8-10 गांवों में रह रहे लगभग दस हजार बंगलादेशी हिंदू शरणार्थियों की नागरिकता पर विचार किया जाएगा। इसलिए उनकी जांच का कार्य तेजी के साथ चल रहा है। जांच में जो अवैध बंगलादेशी शरणार्थी पाए जाएंगे उनको देश से बाहर निकाला जाएगा। गुरुवार को सूर्य कुमार शुक्ल सर्किट हाउस में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
सूर्य कुमार शुक्ल ने बताया कि पूर्वी पाकिस्तान (बंगलादेश) से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवार लंबे समय से मवाना तहसील के क्षेत्र के गांव नंगला गोसाई में झील के लिए निर्धारित भूमि पर निवास कर रहे हैं। इन परिवारों को जनपद कानपुर देहात की तहसील रसूलाबाद में पुनर्वासित किया जाने की प्रक्रिया प्रसीतव है। इसके अलावा बंगलादेश में उत्पीड़न के चलते समय- सयम पर वहां से आकर हिंदू शरणार्थी हस्तिनापुर क्षेत्र के 8-10 गांवों में खाली जमीन पर रहने लगे थे। वर्तमान में इनकी आबादी लगभग 8 से 10 हजार है। ये हिंदू शराणार्थी गरीब व पिछड़े हैं।
सीएनआरसी के यूपी के प्रभारी सूर्य कुमार शुक्ल ने बताया कि वास्तविक पीड़ित हिंदू शरणार्थी की पहचान के लिए हस्तिनापुर में दो जनसेवा केंद्रों पर सीएए की धारा-6 के फार्म भरवाए जा रहे हैं। इसके बाद ये फार्म पोस्ट सीनियर सुपरिंटेंडेंट, मेरठ में चिप किए जाएंगे। यहां से इंटेलीजेंस ब्यूरो सीएए की धारा-6 के अंतर्गत भरे गए फॉमों की जांच पड़ताल करके लखनऊ स्थित सेंसेक्स ऑफिस भेजा जाएगा। नागरिकता पर अंतिम निर्णय सेंसेक्स ऑफिस से लिया जाएगा। इंटेलीजेंस ब्यूरो चिप किए गए फॉर्मों की गहनता से जांच कर पता लगाएगी कि जिन लोगों ने फार्म भरे हैं, वे देश विरोधी न होकर वास्तव में हिंदू शरणार्थी हैं। साथ ही, सीएए की धारा-6 के अंतर्गत भरवाए जा रहे फार्मों की जांच में जो अवैध शरणार्थी पाए जाएंगे उनको देश से बाहर निकाला जाएगा।
वेस्ट के कई जनपदों में हिंदू शरणार्थी
सीएनआरसी के यूपी के प्रभारी तथा यूपी के पूर्व डीजीपी सूर्य कुमार शुक्ल ने बताया कि केंद्र सरकार के आदेश पर प्रदेश सरकार ने बंगलादेश में उत्पीड़न के शिकार हिंदुओं को शरणार्थियों का दर्जा देकर समय- समय पर तराई की बेल्ट के प्रमुख जनपद मेरठ, बिजनौर, पीलीभीत व रामपुर में जमीन अलॉट कर बसाया था, लेकिन गांव नगला गोसाई में झील के किनारे बसे बंगलादेशी हिंदू शरणार्थियों को एनजीटी के द्वारा पर्यावरण का हवाला देकर हटाने का आदेश दिया है। इसलिए पीड़ित शरणार्थियों के पुर्नस्थापना का कार्य किया जाएगा।
