Friday, August 29

कांवड़ियों की बढ़ती संख्या, सिमटती मार्गों की चौड़ाई, वाहन कांवड़ पर लगना चाहिए प्रतिबंध

Pinterest LinkedIn Tumblr +

देश में सर्वधर्म सदभाव की परंपरा सदियों से चली आ रही है। आजादी के दौरान हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई भाई का नारा लगा और उसका असर भी खूब हुआ। देश में अगर कुछ बड़ा है तो वो धर्म है परिस्थिति कुछ भी हो। इसके मानने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। यह भी पक्का है कि भविष्य में जब तक हममें आस्था और भगवान के प्रति विश्वास कायम है यह बढ़ती ही रहेगी। यही कारण है कि देश में एक कहावत प्रचलित है कि हिंदू धर्म में साल के सभी दिन कोई ना कोई त्योहार होता है। पिछले कुछ सालों में धार्मिक यात्राओं में बढ़ोत्तरी हुई है। अब तो सरकार भी विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दर्शन करने का मौका उपलब्ध करा रही है। बाकी ज्यादातर इष्टदेव और भगवान के नाम से अनेकों यात्राएं निकलती हैं मेले लगते हैं। ध्यान से देखें तो यह गलत नहीं है क्योंकि इनसे एकता और भाईचारा बढ़ता है और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश पहुंचता है क्योकि धार्मिक जुलूसों का सभी समुदायों के लोग स्वागत करते हैं और यह समझाने से नहीं चूकते कि हम साथ है।
वर्तमान में हम कांवड़ यात्रा को देख सकते हैं। हरिद्वार से गंगाजल लेकर आ रहे कावंड़ियों की संख्या में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। लगभग पांच दशक पूर्व गिनती के भक्त इच्छा पूरी होने या धार्मिक भावना से ओतप्रोत होकर गंगाजल लेने हरिद्वार ब्रजघाट जाते थे। कठिन तपस्या धूप गर्मी झेलते हुए अपने गंतव्य तक पहुंच जलार्पण करते थे लेकिन हरिद्वार से चलने के बाद कई सालों तक तो कहीं पानी पिलाने की भी व्यवस्था नहीं होती थी लेकिन 80 के दशक में यूपी और हरियाणा के लोगों द्वारा सेवा शिविर लगाने शुरू किए गए। मुझे आज भी याद है कि 86 के आसपास ज्वालापुर से निकलकर बाहदराबाद और फिर रूड़की मंगलौर मुजफफरनगर के अलावा नावले की नहर पर कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा शिविर लगाए जाते थे। कहीं भोजन तो कहीं दवाईयों नहाने के लिए पानी उपलब्ध रहता था। सन 2000 के आसपास शिवभक्तों की संख्या बढ़नी शुरू हुई जो अब चरम पर पहुंच रही है। आगे भी इसके बढ़ने की उम्मीद है।
सड़क की लंबाई चौड़ाई उतनी है या थोड़ा बढ़ी होगी उस समय कांवड़िये कम चलते थे इसलिए धीरे धीरे वाहन कांवड़ शुरू हुई। पैदल की संख्या कम होने से इससे कोई परेशानी नहीं थी। कार बाइक साईकिल से लोग जल लेने जाते थे। वर्तमान में कांवड़ियों की बढ़ती संख्या और वाहन कांवड़ लाने वालों की सवारियों से होने वाली परेशानी और इनकी आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों के भीड़ में घुसने से अनेक परेशानी व्यवस्था बनाने वालों को होने लगी है। जैसा पिछले दिनों कांधला के गांव आल्दी से हरिद्वार गंगाजल लेने जाते समय बुलेट बाइक से पटाखा छोड़ने पर दो पक्षों में संघर्ष हो गया जिसमें 15 घायल हो गए। दूसरे ऑटो में कांवड़ ला रहे व्यक्तियों का पैदल आ रहे कांवड़ियों द्वारा जमकर विरोध किया। एक व्यक्ति झंडा लेकर कांवड़ियों के बीच जा रहा था। रोका गया तो वो दूसरे संप्रदाय का निकला। अभी गत दिवस हरियाणा के स्कॉर्पियो सवारों ने कांवड़ मार्ग पर गाड़ी दौड़ाई जो हादसे का कारण बन सकती थी। ऐसी अनेकों घटनाएं देशभर में कांवड़ मार्गों से आने वाले भक्तों के साथ घटी होने से इनकार नहीं किया जा सकता। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कांवड़ यात्रा सकुशल पूरी हो इसके लिए जरूरी हो गया लगता है कि वाहन कांवड़ पर रोक लगाई जाए या उनके जाने आने का समय ऐसा तय किया जाए जो पैदल कांवड़ियों से संघर्ष की संभावना ना रहे और शिवरात्रि पर्व शांति के साथ निपटे। और हम दुनिया को यह बता सके कि हम ये त्योहार जिसमें करेाड़ों लोग सड़कों पर होते हैं शांति से संपन्न् कराने में सफल रहे। भगवान शंकर को खुश करने के लिए भक्तों को खुद ही पैदल जाकर जल लाना चाहिए चाहे वो किसी भी निकट बहने वाली नदी से जल आएं। इसमें कोई बुराई नहीं है। वैसे भ्ीा कहते हैं कि परिवार का मुखिया अपने बच्चों का बुरा नहीं चाहता तो हम जल अपनी व्यवस्था अनुसार कहीं से भी लाएं बस श्रद्धा भाव में कमी नहीं होनी चाहिए तो भगवान हमें आशीर्वाद जरूर देंगे।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स)

Share.

About Author

Leave A Reply