Monday, January 26

गहरी खाई में कार गिरने से जन्मदिन से 3 दिन पहले मेजर शुभम की मौत

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मेरठ 19 जनवरी (प्र)। देहरादून सड़क हादसे में जान गंवाने वाले मेजर शुभम सैनी का पार्थिव शरीर रविवार को पैतृक गांव घसौली पहुंच गया। उनके परिजनों का रोकर बुरा हाल है।

मेरठ के घसौली गांव निवासी मेजर शुभम सैनी (27) की कार शनिवार सुबह साढ़े नौ बजे देहरादून-चकराता मार्ग पर 50 मीटर गहरी खाई में गिर गई थी। चकराता के छावनी क्षेत्र में बंगला नंबर 10 के पास हुए हादसे के बाद सैन्यकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे और घायल मेजर को खाई से निकाला। सिर पर गंभीर चोटें आने के कारण उन्हें तुरंत सैनिक अस्पताल ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र स्थित उनके गांव घसौली निवासी परिजनों का कहना है कि शुभम सैनी किसी कार्य से चकराता से देहरादून जा रहे थे। रास्ते में किसी वाहन को बचाने के प्रयास में उन्होंने अपनी कार से नियंत्रण खो दिया। इससे उनकी कार खाई में जा गिरी। 2-2 बटालियन के चकराता स्थित मुख्यालय में तैनात मेजर सैनी वर्ष 2019 में लेफ्टिनेंट के पद पर सेना में शामिल हुए थे। बाद में उन्हें मेजर पद पर पदोन्नति मिली थी। हादसे की खबर मिलते ही उनके गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

उनका विवाह नहीं हुआ था। उनके बड़े भाई तुषार व बहन निधि भी अविवाहित हैं। परिवार के सदस्य सिविल सेवाओं की तैयारी कर रहे हैं। पोस्टमार्टम के बाद मेजर का पार्थिव शरीर रविवार सुबह गांव लाया गया।

पापा, बहुत जल्द छुट्टी लेकर घर आ रहा हूं। इसके बाद तुषार भईया की शादी की तैयारी करेंगे। ये बातें मेजर शुभम सैनी ने शुक्रवार को अपने पिता से फोन पर कही थीं। 18 फरवरी को शुभम के बड़े भाई तुषार की शादी है। परिवार में खुशी का माहौल है, मगर शनिवार दोपहर देहरादून से आई एक कॉल ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। मेजर शुभम की मौत की सूचना मिलने के बाद पिता सत्येंद्र, मां रीता, बहन व अन्य परिजनों का रोकर बुरा हाल हो गया। दरअसल मेजर शुभम सैनी का 21 जनवरी को बर्थडे है। इसी बर्थडे पर उनको मेरठ आना था। लेकिन बर्थडे से पहले ही ये हादसा हो गया।

शुभम के दोस्तों ने बताया कि तीन दिन बाद 21 जनवरी को शुभम का बर्थडे था क्योंकि इस बार उसके परिवार में उसके बड़े भाई की शादी भी थी तो वह लंबी छुट्टी लेकर घर आने वाला था। इसके लिए हम सभी इस बार अपने दोस्त का जन्मदिन बहुत अच्छे से मानने वाले थे, लेकिन वहां से आई एक कॉल ने हमारी खुशियों को गम में बदल दिया।

जिस समय शुभम का पार्थिव शरीर उसके घर से शमशान घाट की ओर जाने लगा उसे समय रोती हुई शुभम की मां ने उसके ताबूत को चूमते हुए बोला मेरा बेटा आज मुझे इस प्रकार छोड़कर जा रहा है कि वह कभी वापस नहीं आएगा।

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