मेरठ 16 अप्रैल (प्र)। देशभर में डिजिटल अरेस्ट, गेमिंग एप और शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह का सरगना नवील अख्तर है, जो दुबई में बैठकर पूरा नेटवर्क संचालित करता था। गिरफ्तार गिरोह के तीन बदमाशों से नौ मोबाइल फोन, 10 एटीएम कार्ड और एक चेकबुक बरामद की गई। आरोपितों ने बताया कि गिरोह प्रतिदिन एक करोड़ की साइबर ठगी का टार्गेट लेकर काम करता था। गिरोह ने सौ खाते किराए पर ले रखे हैं। नबील एक साल पहले दिल्ली से जेल जा चुका है। जमानत पर छूटने के बाद से वह दुबई में रह रहा था। साइबर सेल भी इस गिरोह की जांच कर रही थी।
एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि लालकुर्ती थाने में बैंक स्ट्रीट कालोनी निवासी सुवालीन से खाता लेकर साइबर ठगी की रकम मंगवाई गई थी। सुवालीन की तरफ से शाकिब निवासी श्यामनगर, अरबाज, फैसल व असद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस जांच में सामने आया कि उक्त लोग साइबर ठगी की रकम के लिए खातों की खरीदारी करते हैं। इस गिरोह का सरगना लिसाड़ीगेड थाना इस्लामाबाद निवासी नवील अख्तर है, उसके साथ अरबाज निवासी प्रहलाद नगर और हैदर निवासी जीबीआइ कालोनी ब्रह्मपुरी काम करते हैं। तीनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में दबिश डाली जा रही है। नवील हाल ही में दुबई से लौटा था। वह दुबई से ही साइबर ठगी का गिरोह चला रहा था। गिरोह के बदमाश यूएसडीटी का प्रयोग कर क्रिप्टो ट्रेडिंग बिट क्वाइन खरीदकर भारतीय करेंसी को विदेश में ट्रांसफर कर देते थे। बाद में हवाला के जरिये दिल्ली में वेंडरों से रकम ले लेते थे। वेंडर सौ रुपये के बदले में 80 रुपये देते हैं।
पुलिस के अनुसार, यह रकम बाद में क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजी जाती थी। आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए खातों की जांच एनसीआरपी पोर्टल पर करने पर कई राज्यों से शिकायतें मिली हैं। बताया गया है कि आरोपी अब तक लगभग 100 बैंक खाते खरीदकर साइबर ठगी को अंजाम दे चुके हैं।
पुलिस की ढीली कार्रवाई से अदालत ने हटाई संगठित अपराध की धारा
नवील अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग है, जो गिरोह बनाकर काम करता है। उसके गिरोह में लिसाड़ीगेट और ब्रह्मपुरी क्षेत्र से लेकर हापुड़ और मुजफ्फरनगर के लोग शामिल हैं। पुलिस ने इसके मद्देनजर ही नबील पर संगठित अपराध की धारा बीएनएस 111 (3) लगाई थी, लेकिन पुलिस कोर्ट में इस धारा के साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। पुलिस ने दिल्ली में दर्ज नवील के खिलाफ मुकदमे का भी अपनी केस डायरी में उल्लेख नहीं किया।
ऐसे में कोर्ट ने माना कि नबील संगठित अपराधी है। अदालत ने मुकदमे से बीएनएस 111(3) की धारा हटा दी इस धारा में पांच साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रविधान है। पुलिस अब दिल्ली में दर्ज मुकदमे की जानकारी जुटा रही है। बता दें कि एक साल पहले नवील को दिल्ली की साइबर सेल ने उठाया था, मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा गया था। तब उसकी शादी भी टूट गई थी। सीओ नवीना शुक्ला का कहना है कि अन्य अपराधियों की तलाश की जा रही है। साथ ही देशभर में दर्ज गिरोह पर पुराने मुकदमों का रिकार्ड भी देखा जा रहा है।
