Sunday, June 23

राहुल गांधी ही लगा सकते हैं 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष की नैया पार

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2024 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर का मुकाबला करने और ज्यादा से ज्यादा अपने सांसद जिताकर संसद में भेजने के लिए प्रयासरत कुछ विपक्षी दलों को छोड़ बाकी द्वारा बनाए गए इंडिया गठबंधन की स्थिति पर अगर चर्चा करें तो जो दल इसमें शामिल नहीं हुए हैं उनके बिना भी अगर गठबंधन ईमानदारी के साथ चुनाव लड़ता है और सीटों के बंटवारे को लेकर कोई बवाल नहीं होता तो काफी अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। खबर के अनुसार गठबंधन के नेता द्वारा राहुल गांधी का नाम नेतृत्वकर्ता के रूप में उभारा गया था और जहां तक उम्मीद की जाती है गठबंधन की सबसे मजबूत कड़ी नीतिश कुमार भी राहुल गांधी के नाम पर सहमत हो सकते हैं और मप्र विधानसभा चुनाव को लेकर सपा कांग्रेस में कड़वाहट दूर हो जाती है और यूपी में सपा को सम्मानजनक सीटें मिलती है तो अखिलेश यादव भी राहुल गांधी के नाम पर ज्यादा ऐतराज शायद नहीं करेंगे। दक्षिण भारत के कई प्रदेशों में कांग्रेस का अपना प्रभाव है। इसलिए मेरा मानना है कि फिलहाल गठबंधन में जो नेता है वो आपसी सहमति के आधार पर निर्णय लेकर सीटों के बंटवारे के बाद राहुल गांधी का नाम संभावित प्रधानमंत्री के रूप के सामने रखकर चुनाव लड़ंे तो अच्छा है क्योंकि अभी तक विपक्ष का जो इतिहास रहा है क्षेत्रीय दल अपने समकक्ष किसी नेता को प्रधानमंत्री के रूप में आगे लाने में शामिल नहीं हो पाएंगे। इसलिए जहां तक मुझे लगता है कांग्र्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जिन्हें जनता नरेंद्र मोदी के बाद पसंद करती है वो राहुल गांधी यह मुकाबला भी आसानी से कर सकते हैं।
जहां तक बसपा के बिजनौर से सांसद उद्योगपति मलूक नागर का यह कहना कि अगर इंडिया गठबंधन मायावती को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए तो बसपा उसमें शामिल होने का सोच सकती है। यह एक ऐसा सुझाव है जिसे शायद कोई भी गठबंधन का लीडर आसानी से नहीं मानेगा। ऐसा नहीं है कि बसपा सुप्रीमो प्रधानमंत्री का पद ना संभाल पाए मगर यहां सवाल वजूद का है। अगर उनके समकक्ष दलों के नेता उन्हें इस पद के लिए आगे बढ़ाएंगे तो वो पीछे रह जाएंगे यह अटल सत्य है। इसलिए इन परिस्थितियों में तो बसपा और इंडिया गठबंधन का तालमेल आसानी से संभव नहीं लगता है।
नीतीश-लालू ने बांटी सीट
विपक्षी गठबंधन के बिहार के सीएम नीतीश कुमार और पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव द्वारा बिहार में 17-17 सीटें राजद और जदयू के बीच बांट ली गई हैं। इस प्रदेश में लोकसभा की 40 सीटें हैं जिनमें जदयू के पास 16 और कांग्रेस के पास एक सीट बताई जाती है। इन दोनों के बंटवारे के बाद छह सीट बचती है। अगर परिस्थिति को देखे तो यहां समझौता आसानी से हो सकता है क्योंकि लालू और नीतीश जरूरत होने पर कुछ कम सीटो पर भी मान सकते है। क्योंकि उनका मेन मकसद प्रदेश की राजनीति में दबदबा बनाए रखना है ना कि केंद्र की सत्ता पर काबिज होना।
अब जहां तक सवाल है कांग्रेस का तो इस पार्टी के नेता राहुल गांधी के नाम पर बिना किसी विरोध के एक हो सकते हैं। क्योंकि एक तो उनके द्वारा की गई भारत जोड़ो यात्रा ने कांग्र्रेस के साथ साथ अन्य विपक्षी दलों ने भी जान पैदा की थी और उसके अलावा कभी प्रधानमंत्री को जादू की झप्पी और उनके द्वारा किए जा रहे संघर्ष और प्रयास को मतदाता पसंद कर रहा है और उन्हें अब गंभीरता से लेने लगा है। दूसरी तरफ 14 राज्यों के 85 जिलों में 14 जनवरी को भारत न्याय यात्रा शुरू कर 6200 किमी की लंबी यात्रा जो बीस मार्च को समाप्त होगी। वो अपने आप में महत्वपूर्ण कही जा सकती है इंडिया गठबंधन के लिए। बीते 21 दिसंबर को कांग्रेस की बैठक में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का दूसरा चरण पूरब से पश्चिम के बीच पूरा करने के आए प्रस्ताव से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस के साथ साथ क्षेत्रीय दलों को भी बल मिलेगा। जहां तक नजर आ रहा है अब कांग्रेस पार्टी को भी सक्रिय करने में लगी है।
14 संचार समन्वयक नियुक्त
पदाधिकारियों के कार्य क्षेत्र बदले गए तो अब विभिन्न राज्यों के लिए 14 संचार समन्वयक नियुक्त किए गए हैं। आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अभी से अपनी तैयारियों में लग गई है। हाल ही में संगठनात्मक बदलावों के बाद अब देश की सबसे पुरानी पार्टी ने राज्यों के लिए 14 संचार समन्वयक नियुक्त किये हैं। पार्टी ने इस संबंध में बयान भी जारी किया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ को कर्नाटक के लिए संचार समन्वयक नियुक्त किया गया है। वहीं, राधिका खेड़ा को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है। मैथ्यू एंटनी पूर्वोत्तर राज्यों और महिमा सिंह असम के लिए संचार समन्वयक नियुक्त किया गया है। अन्य संचार समन्वयक के रूप में बी आर अनिल कुमार को आंध्र प्रदेश, आलोक शर्मा को बिहार, हर्षद शर्मा को गोवा, सचिन सावंत को गुजरात, अजय उपाध्याय को हरियाणा, अमृत गिल को हिमाचल प्रदेश, ज्योति कुमार सिंह को झारखंड , अर्शप्रीत खडियाल को जम्मू, परवेज आलम को कश्मीर और लद्दाख, लावण्या बल्लाल जैन को केरल, चरण सिंह सपरा को मध्य प्रदेश, सुरेंद्र सिंह राजपूत को महाराष्ट्र, बोबीता शर्मा को ओडिशा, अंशुल अविजित को पंजाब, रितु चौधरी को राजस्थान, भाव्या नरसिम्हामूर्ति को तमिलनाडु और पुडुचेरी, सुजाता पॉल को तेलंगाना, चयनिका उनियाल को उत्तराखंड, अभय दुबे को उत्तर प्रदेश और अंशुमन को पश्चिम बंगाल के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों के संदर्भ में कांग्रेस ने कहा कि नवनियुक्त संचार समन्वयक मीडिया और संचार-संबंधी गतिविधियों के सुचारू कामकाज के लिए राज्य पार्टी इकाइयों और एआईसीसी संचार विभाग के साथ निकट समन्वय में काम करेंगे। इससे यह भी लगता है कि कांग्रेस अब हर फ्रंट पर मजबूती से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
राहुल ने खाया सरसो का साग बाजरे की रोटी
बीते दिनों कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ब्रजभूषण के करीबी संजय सिंह के कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बनने के बाद बजरंग पूनिया आदि से वीरेंद्र अखाड़े में मुलाकात की। जहां उन्होंने बजरंग पूनिया के साथ अखाड़े के दाव पेच सीखे सरसो के साग के साथ बाजरे की रोटी का स्वाद लिया। और पहलवान कितने उत्साहित थे इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि अचानक राहुल गांधी को अपने बीच देखकर पहलवानों ने अखाड़े के खेत से मूली तोड़ राहुल गांधी को प्रतीक स्वरूप भेंट की जो कह सकते हैं कि पहलवानों ने मन से कांग्रेस नेता का स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने पहलवानों से बातचीत की।
‘इंडिया’ का प्रदर्शन तय करेगा भविष्य
एक बात विश्वास से कही जा सकती है कि अगर गठबंधन सही तरीके से प्रयास करता है तो इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता। यही स्थिति उनकी सफलता का राज एक खबर के अनुसार छह राज्यों में ‘इंडिया’ का प्रदर्शन तय करेगा भविष्य।
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में सीटों के बंटवारे को लेकर सक्रियता बढ़ गई है। इससे छह राज्यों में लोकसभा की 196 सीटों पर असर पड़ सकता है। इन राज्यों में अभी 113 सीटें इस गठबंधन के पास हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि गठबंधन अच्छी तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतरे तो वह इन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
हालांकि दो राज्यों उत्तर प्रदेश और दिल्ली में गठबंधन के प्रभाव को लेकर राजनीतिक जानकार आश्वस्त नहीं हैं। इन दो राज्यों में ‘इंडिया’ के पास 87 में से महज छह सीटें हैं। यदि बसपा भी इसमें जुड़ती है तो भी उसकी मौजूदा ताकत महज 16 सीटों की बनती है।
‘इंडिया’ गठबंधन के दलों की प्रभावी उपस्थिति महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पंजाब में है। पिछले चुनाव में विपक्षी गठबंधन ने सबसे अच्छा प्रदर्शन तमिलनाडु में किया था और द्रमुक के नेतृत्व में 39 में से 38 सीटें जीतने में सफलता हासिल की थी। पर इस बार आसान नहीं होगा।
बिहार से ज्यादा उम्मीदें
‘इंडिया’ गठबंधन के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद बिहार में है क्योंकि इस बार राजद, कांग्रेस, वाम दलों के अलावा जदयू भी इसका हिस्सा है। पिछली बार जदयू राजग के साथ था।
पश्चिम बंगाल में कड़ी टक्कर के आसार
प. बंगाल में तृणमूल कांग्रेस 22 और कांग्रेस ने दो सीटें जीती थीं। 18 सीटें तब भाजपा ने जीती थी। यहां ‘इंडिया’ को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
महाराष्ट्र में माहौल बदला
महाराष्ट्र में पिछली बार 48 में से शिवसेना ने 18, राकांपा ने चार तथा कांग्रेस ने एक सीट जीती थी। शिवसेनातब भाजपा के साथ थी। अब स्थितियां बदल चुकी हैं।
पंजाब में उम्मीदें
पंजाब में 13 में से आठ सीटें सीटें कांग्रेस तथा एक आम आदमी पार्टी के पास हैं। कांग्रेस और आप में गठबंधन होने से गठबंधन की स्थिति बेहतर हो सकती है।
मेरा मानना हमेशा रहा है कि सरकार किसी की भी हो लेकिन विपक्ष मजबूत रहना चाहिए क्योंकि इससे संतुलन बना रहता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए फिलहाल पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव, नीतीश कुमार आदि आपस में विचार कर 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर चुनाव मैदान में उतरे तो इससे क्षेत्रीय दल भी मजबूत होंगे और लोकसभा में उनके सांसदों की संख्या में हो सकती बढ़ोत्तरी।

 

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