मेरठ 30 मार्च (प्र)। वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरू में यानी एक अप्रैल से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यापारियों को राहत देने जा रहा है। डेढ़ करोड़ रुपये तक की टर्नओवर करने वाले व्यापारियों को लाइसेंस नहीं लेना पड़ेगा, उन्हें सिर्फ 100 रुपये देकर पंजीकरण कराना पड़ेगा। इसके अलावा 50 करोड़ तक के टर्नओवर वाले व्यापारियों को राज्य स्तर पर लाइसेंस मिलेगा।
दरअसल, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा खाद्य कारोबारियों के लिए लाइसेंस और पंजीकरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं, बदलाव एक अप्रैल से लागू किए जाएंगे। पंजीकरण की वार्षिक टर्नओवर सीमा 12 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये कर दी गई है। इन व्यापारियों को सिर्फ 100 रुपये में पंजीकरण कराना होगा। एफएसडीए ने कारोबार की सीमा को कई गुना बढ़ा देने से खाद्य कारोबार से जुड़े छोटे और मध्यम व्यापारियों एक अप्रैल से खासी राहत मिलेगी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा कारोबार की सीमा को कई गुना बढ़ाने से अधिक संख्या में छोटे व्यापारी केवल पंजीकरण के दायरे में आ जाएंगे। साथ ही फीस में भी भारी कमी होने से उनपर आर्थिक बोझ कम हो जाएगा। इस बदलाव से छोटे व्यापारियों, ढाबा संचालकों, मिठाई और स्ट्रीट फूड विक्रेता लाभांवित होंगे। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी रवि शर्मा ने बताया कि जिन कारोबारियों के लाइसेंस या पंजीकरण की वैधता 31 मार्च तक है, उन्हें नए नियमों के अनुसार नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा।
उन्होंने बताया कि पहले 12 लाख रुपये के वार्षिक कारोबार तक के कारोबारियों को पंजीकरण की श्रेणी में रखा जाता था। उन्हें लाइसेंस लेना अनिवार्य होता था, जिसकी फीस पांच हजार रुपये थी। अब इस सीमा को बढ़ाकर सीधे 1.50 करोड़ रुपये कर दिया गया, जिससे उन्हें लाइसेंस नहीं लेना पड़ेगा, वे सिर्फ सौ रुपये में पंजीकरण करा सकेंगे। उन्होंने बताया कि पहले पांच करोड़ रुपये तक के कारोबारियों को राज्य स्तर से लाइसेंस मिलता था, जबकि इससे अधिक टर्नओवर होने पर केंद्रीय लाइसेंस लेना पड़ता था। अब यह सीमा बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई है। जिनका टर्नओवर 50 करोड़ रुपये है, उन्हें भी राज्य स्तर से लाइसेंस मिल जाएगा। रवि शर्मा के अनुसार, नए नियमों का उद्देश्य कारोबार को आसान बनाना, छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहित करना और लाइसेंस प्रक्रिया को सरल करना है।
