Friday, August 29

हरियाणा के रिटायर्ड क्लर्क ने भरा उपराष्ट्रपति चुनाव का नामांकन

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भिवानी 23 अगस्त। हरियाणा के भिवानी जिले के चांग गांव निवासी 71 वर्षीय जगत सिंह ने एक बार फिर राजनीति में सक्रिय भागीदारी दिखाते हुए उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है. जगत सिंह पहले भी तीन बार राष्ट्रपति चुनाव के लिए पर्चा भर चुके हैं, हालांकि हर बार उनका नामांकन रद्द कर दिया गया. इस बार भी संभावना है कि उनका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा.

सरकारी कर्मचारियों की आवाज बनने का संकल्प: जगत सिंह का कहना है कि वे हर चुनाव में सरकारी कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाते हैं. उनका मानना है कि जब तक कर्मचारी सशक्त नहीं होंगे, तब तक प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर नहीं हो सकती. उनका सपना है कि सभी सरकारी विभागों में खाली पदों को भरा जाए और SYL नहर में हरियाणा को पूरा पानी मिले.
चांग गांव के जगत सिंह 71 वर्ष 6 माह के हो चुके हैं। जिन्होंने 36 साल 2 माह तक बिजली निगम में नौकरी की। इस दौरान मीटर रीडर से शुरुआत की और कई पदों पर रहे। वहीं 2012 में वे अपर डिवीजन क्लर्क (UDC) के पद से रिटायर हो गए।

इसके बाद उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ने का मन बनाया। इसलिए उन्होंने वर्ष 2012, 2017 व 2022 में लगातार राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए, लेकिन आवेदन पत्र रिजेक्ट होने के कारण वे चुनाव नहीं लड़ पाए।
साल 2012 में जगत सिंह क्लर्क पद से रिटायर हुए। तभी मन बना लिया था कि अपने सरकारी कर्मियों की मांगें पूरी करवाने के लिए चुनाव मैदान में उतरेंगे। 2012 में सीधे राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन भर दिया। उस चुनाव में कांग्रेस गठबंधन की ओर से प्रणब मुखर्जी और विपक्ष की ओर से पीए संगमा उम्मीदवार थे। प्रणब मुखर्जी 13वें राष्ट्रपति बने। जगत सिंह का नामांकन रद्द हो गया था।
साल 2017 में 14वें राष्ट्रपति चुनाव के लिए भाजपा ने रामनाथ कोविद और कांग्रेस व विपक्ष ने मीरा कुमार को राष्ट्रपति प्रत्याशी बनाया। जगत सिंह भी अपना नामांकन करने पहुंच गए। 2012 की तरह इस बार भी उनका नामांकन रद्द हो गया। फिर 2022 में 15वें राष्ट्रपति के चुनाव में भी जगत सिंह ने नामांकन किया। तब भाजपा नीत NDA ने द्रोपदी मुर्मू और विपक्ष ने यशवंत सिन्हा को प्रत्याशी बनाया। इस बार भी जगत सिंह का नामांकन रद्द हुआ।

भारत में राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन के लिए 50 सांसदों का प्रस्तावक और 50 का अनुमोदक होना आवश्यक है. वहीं, उपराष्ट्रपति पद के लिए ये संख्या 20+20 यानी कुल 40 सांसदों की समर्थन आवश्यक है. जगत सिंह को किसी भी सांसद का समर्थन नहीं मिला, जिसके चलते उनका नामांकन इस बार भी रद्द होना लगभग तय है.

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