Thursday, April 9

सपा विधायक अतुल प्रधान सीलिंग कार्रवाई को लेकर बोले-सेंट्रल मार्किट का लैंडयूज चेज कराए सरकार

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मेरठ 09 अप्रैल (प्र)। देश के किसी भी सदन में बैठे जनप्रतिनिधि की पहली जवाबदेही उसके क्षेत्र की जनता के प्रति होती है। ना जाने वह किस बात से डरे हैं जो जनता की आवाज भी नहीं उठा पा रहे। हर जनप्रतिनिधि की पहली जिम्मेदारी जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाना है। इसीलिए जनता अपना प्रतिनिधि विधायक व सांसद के रूप में चुनती है। सपा सुप्रीमो ने कहा कि अगर सेंट्रल मार्किट के व्यापारियों को कानूनी मदद चाहिए तो वह तैयार हैं।

यह कहना था समाजवादी पार्टी के सरधना विधानसभा सीट से विधायक अतुल प्रधान का जो बुधवार को सेंट्रल मार्किट में सीलिंग कार्यवाही पर विरोध दर्ज कराने व्यापारियों के बीच पहुंचे थे। अतुल प्रधान ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने जा रही है। सरकार बनते ही वह व्यापारियों को इस समस्याओं से निजात दिलाएंगे। इस दौरान उन्होंने व्यापारियों के बीच मौजूद रहकर रामधुन भी गायी।

सपा विधायक ने कहा कि लोकसभा हो या फिर विधानसभा, यहां बैठे प्रत्येक जनप्रतिनिधि का दायित्व उसके क्षेत्र की जनता के प्रति है। अगर जनप्रतिनिधि ही जनता की आवाज को सरकार तक नहीं पहुंचाएगा तो फिर उसके जनप्रतिनिधि होने का फायदा ही क्या है। सत्ता सरकार में रहकर मदद करती है और विपक्ष विरोध में रहकर।

सपा विधायक ने कहा कि अयोध्या में सरकार ने अपने बड़े उद्योगपति साथी को लाभ पहुंचाने के लिए पांच से छह बार लैंडयूज चेंज किया। सेंट्रल मार्किट के मामले में सरकार ऐसा क्यों नहीं कर रही। सरकार को चाहिए कि वह कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर पास कराए ताकि व्यापारी व उनका व्यापार सुरक्षित रहे।

अतुल प्रधान ने कहा कि सरकार अगर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपने प्रदेश के व्यापारियों का मजबूती से पक्ष रखती तो आज अस्पताल, स्कूल बंद नहीं करने पड़ते। यहां के सांसद अरुण गोविल तो भगवान राम के नाम पर सांसद बन गए लेकिन जनता के लिए कुछ नहीं किया।
अतुल प्रधान ने कहा कि सरकार अगर आज भी सेंट्रल मार्किट के व्यापारियों के दिल में बसे दर्द का संज्ञान ले तो बहुत कुछ हो सकता है। हरीश सालवे जैसे बड़े बड़े लोगों के केस वहां लड़े जाते हैं तो फिर सरकार व्यापारियों की आवाज क्यों नहीं बनती। लैंडयूज चेंज कर सरकार व्यापारियों को राहत प्रदान कर सकती है।

सपा विधायक ने कहा कि पिछले प्रकरण के बाद आवास एवं विकास परिषद ने कंपाउंडिंग की प्रक्रिया शुरु की। 70 करोड़ रुपया इसकी एवज में जमा हुआ। फिर आवास एवं विकास परिषद के अफसर जवाब देने क्यों सामने नहीं आ रहे हैं। ध्वस्तीकरण का संकट मंडरा रहा है। सरकार क्यों अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रही।

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