Monday, April 15

हर पॉलिटिशियन को मिले चंदे की हो जांच जौहर विवि के समान

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यूपी के पूर्व मंत्री सपा के दमदार लीडर आजम खान और उनका परिवार यूपी की जेलों में विभिन्न आरोपों में बंद हैं।
एक खबर से स्पष्ट होता है कि उनके सहयोगी 13 ठेकेदारों के प्रतिष्ठानों पर छापा मारने के साथ ही अब आजम खान पर आयकर का शिकंजा भी कसता जा रहा है तथा जौहर यूनिवर्सिटी को मिले चंदे की छानबीन शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि सपा सरकार में यूनिवर्सिटी की लागत दो हजार करोड़ आंकी गई थी जो भाजपा सरकार में 137 करोड़ के आसपास ही रह गई। कुछ सूत्रों का कहना है कि चंदे की छानबीन के साथ साथ वसूली अभियान भी चल सकता है।
वैसे तो राजनीति में ईमानदारी और पारदर्शिता जनहित में वक्त की सबसे बड़ी मांग है। लेकिन शायद इसका पालन नहीं हो पा रहा है। और कोई इसे अपनाना भी नहीं चाहता है। वैसे तो ऐसे प्रकरणों में ज्यादा घुसने से असंतोष और बदअमनी ही फैलती है। लेकिन अगर हर मामले में आजम खान जैसी कार्रवाई होने का विश्वास जनता को हो जाए तो यह प्रयास भारतीय राजनीति में साफ सुथरी छवि बनाए रखने के लिए किसी के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। बस यह है कि अगर एक मामले में जो कार्रवाई होती है तो हर प्रकरण में चाहे वह सत्ताधारी दल से संबंध हो या विपक्ष सबमें हो ऐसी ही कार्रवाई। अगर ऐसा होता है तो यह वर्तमान में मोदी और योगी सरकार का सबसे प्रशंसनीय कदम हो सकता है।

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