मेरठ 20 जनवरी (प्र)। नगर निगम कार्यकारिणी में भाजपा नेताओं की रणनीति को धूल चटाकर जीत हासिल करने वाले बागी पार्षद संजय सैनी समेत बाकी सभी छह नये सदस्यों को शपथ दिलाई गई। अब कार्यकारिणी का उपाध्यक्ष बनने की भागदौड़ शुरू हो गयी है।
नगर निगम कार्यकारिणी के छह सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के बाद गत वर्ष 17 नवंबर को चुनाव कराये गये थे। उस चुनाव में भाजपा ने अपने पूर्व कार्यकारिणी सदस्य रहे संजय सैनी को टिकट नहीं दिया तो उन्होंने अपने खेमे के पार्षद पवन चौधरी को कार्यकारिणी का सदस्य बनाने के लिए कोशिश की। लेकिन भाजपा नेतृत्व ने साफ कर दिया कि जो एक बार सदस्य रह चुका है, उसे दोबारा नहीं लिया जायेगा। जबकि संजय सैनी इस बात पर अड़ गये कि वह खुद चुनाव लड़ेंगे। इसपर भाजपा ने संजय सैनी को पार्टी से निकाल दिया। लेकिन गैर भाजपाई पार्षदों की मदद से संजय सैनी ने चुनाव में ताल ठोंकी तथा जीत भी हासिल कर ली। तब आनन-फानन में पहले राऊंड का मतगणना परिणाम आने के बाद चुनाव परिणाम रद्द कर दिया गया।
पूरे दो महीने बद 17 जनवरी को पुनः चुनाव कराये गये। लेकिन दो महीने बाद भी भाजपा नेतृत्व जिस बात से बच रहा था, वही हुआ। इस चुनाव में गैर भाजपाई पार्षदों की मद्द से संजय सैनी ने फिर से कार्यकारिणी चुनाव में जीत हासिल कर ली। सोमवार को महापौर हरिकांत अहलूवालिया के कैंप कार्यालय सूरज कुंड पर नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के छह पार्षदों को शपथ दिलाई गई। महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने कार्यकारिणी में चुने गये भाजपा पार्षद पंकज गोयल, निरंजन वाल्मीकि, रेशमा सोनकर, मास्टर सतपाल के साथ भाजपा के बागी संजय सैनी तथा समाजवादी पार्टी की एकमात्र सदस्य कहकशां जीशान शाहिद अब्बासी को शपथ दिलाई। इस दौरान नगर आयुक्त सौरभ गंगवार, उप नगर आयुक्त तथा नगर निगम के सैकड़ों पार्षद मौजूद रहे। उधर महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने शपथ दिलाने के बाद सभी छह नये सदस्यों का स्वागत भी किया। उन्होंने अपने ही बागी संजय सैनी से भी आत्मीयता से मुलाकात करते हुए कहा कि पूरा निगम एक ही परिवार है। हमारी किसी से कोई द्वेष भावना नहीं है। शहर के विकास के लिए सभी को एक होकर कार्य करना है।
अपना उपाध्यक्ष चाहती है सपा
नगर निगम कार्यकारिणी में अंदरूनी तौर पर जिस तरह से भाजपाई पार्षदों को शिकस्त दी गयी। उससे समाजवादी पार्टी के पार्षदों में काफी जोश है। समाजवादी पार्टी के पूर्व पार्षद दल नेता शाहिद अब्बासी का कहना है कि कार्यकारिणी में हम इस बार गैर भाजपाई पार्षद को उपाध्यक्ष बनाने की गुप्त रणनीति पर काम कर रहे है क्योंकि शहर के विकास में समानता से कार्य नहीं होता है। पार्षदों की शक्लें देखकर विकास के कार्य लगाये जाते हैं। किसी वार्ड में तो पूरे वित्तीय वर्ष में एक लाख रुपये के भी कार्य नहीं कराये गये और कई वार्डो में तो आवश्यकता न होने के बावजूद विकास कार्यों की झड़ी लगा दी गयी है। इसलिए जब हमारी पार्टी का उपाध्यक्ष होगा तो महापौर तथा नगर निगम के अधिकारियों को मनमानी करने का अवसर नहीं मिल पायेगा।
