मेरठ 12 मार्च (प्र)। मेरठ में घरेलू गैस सिलेंडरों की शॉर्टेज से जुड़ी अफवाहों के बीच ब्लैक मार्केटिंग का खेल शुरू हो गया है। उपभोक्ताओं को बुक किया गया सिलेंडर 8 दिन में भी नहीं मिल पा रहा है। जबकि सिलेंडर डिलीवर करने वाले ही 1500 से 2000 रुपए में सिलेंडर तुरंत उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसी शिकायत बढ़ती जा रही हैं।
मेरठ में IOCL, HPCL और BPCL की 80 गैस एजेंसी हैं। इन एजेंसियों पर लगभग 9.50 लाख उपभोक्ता पंजीकृत हैं। एक घरेलू उपभोक्ता को साल में 12 सिलेंडर का प्रावधान रहा है, जिसे वह कभी भी ले सकते थे। मिडिल ईस्ट में युद्ध के बाद जिस तरह की संभावनाएं बन रही हैं, उसको देखते हुए अब उपभोक्ता को सिलेंडर मिलने के 25 दिन बाद ही दूसरा सिलेंडर मिल सकेगा।
वर्तमान की जो स्थिति है उसके अनुसार ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। पहले उपभोक्ता ऑनलाइन गैस बुक करते थे और 2 दिन के भीतर डिलीवरी हो जाती थी। अब हालात खराब हैं। एजेंसियां ऑनलाइन नंबर थम रही है लेकिन बुकिंग हो नहीं पा रही। नतीजा यह है कि गैस एजेंसियों के दफ्तरों पर भीड़ जुट रही है।
गैस एजेंसियों पर सुबह होते ही उपभोक्ताओं की कतार लग रही हैं। लोग गैस बुक कराने पहुंच रहे हैं, जिससे एजेंसी संचालक भी परेशान हैं। आरोप है कि एजेंसी संचालक भी अब उपभोक्ताओं को KYC के जाल में फंसाकर परेशान कर रहे हैं।
उपभोक्ताओं को कहना है कि अभी तक सब कुछ ठीक था। ऑनलाइन सिलेंडर मिल रहा था। जैसे ही यह समस्या पैदा हुई KYC शुरू करा दी।
सबसे बड़ी समस्या यहां सर्वर की दिखाई दी। ऑनलाइन गैस बुकिंग पहले ही बंद हो चुकी है। अब ज़ब सर्वर भी जवाब देने लगा है तो एजेंसियों की स्थिति भी बिगड़ने लगी है। पूरे दिन उपभोक्ताओं की भीड़ लगी रहती है लेकिन सर्वर ना चलने के कारण बुकिंग की संख्या निरंतर घट रही है।
सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों का कुछ लोगों ने फायदा उठाना शुरू कर दिया है। वह डिलीवरी के लिए सिलेंडर लेकर तो जा रहे हैं लेकिन सप्लाई नहीं दे रहे हैं। आरोप है कि डिलीवरी मैन 15 सो रुपए से दो हजार में सिलेंडर तुरंत उपलब्ध करा रहे हैं।
जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि घरेलू गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। उपभोक्ताओं को परेशानी ना हो इसके लिए 10 टीम बना दी गई हैं। यह टीमें गैस एजेंसी और गोदाम का औचक निरीक्षण करेंगी। अगर कोई गड़बड़ करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल FIR की कार्रवाई की जाएगी।
